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6 अक्तूबर, 2020|4:06|IST

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Ganga express way

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गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को पूरा करना है 2023 तकराज्य मुख्यालय-अजित खरेमेरठ से प्रयागराज तक बनने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे परियोजना में अब तेजी आएगी। यूपी सरकार इसके निर्माण में होने वाले खर्च के लिए निजी सेक्टर के बैंकों से कर्ज लेगी। इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण 2023 तक पूरा करने का  लक्ष्य है। ऐसे में पहली प्राथमिकता अब  गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण शुरू कराने के लिए बड़ी रकम के इंतजाम करने का है। सरकार की नजर निजी वित्तीय संस्थाओं व बैंकों से दीर्घकालीन कर्ज पर है।असल में सार्वजनिक बैंकों से प्रदेश सरकार पहले ही निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे के लिए काफी कर्ज ले चुकी है। इसी वजह से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस व बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का काम तेजी से चल रहा है।  चार एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के लिए यूपीडा को बैंकों द्वारा 22805 करोड़ रुपये का कर्ज अलग-अलग समय पर मंजूर किया जा चुका है। इस कर्ज पर ब्याज नियमित रूप से अदा किया जा रहा है।भारतीय रिजर्व बैंक के नियमानुसार इन बैंकों की यूपीडा के लिए एकल एक्सपोजर सीमा पूरी हो रही है। अब गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए इन बैंकों से कर्ज लेने की गुंजाइश न के बराबर है।आमदनी के नए स्त्रोतइंडियन बैंक से 5780 करोड़ रुपये, बैंक आफ बड़ौदा से 4000 करोड़ रुपये, पंजाब नेशनल बैंक से 3050 करोड़, बैंक आफ इंडिया से 2500 करोड़ रुपये के कर्ज लिया जा चुका है।हाल में यूपीडा ने आमदनी के नए  स्त्रोत तलाशने शुरू किए हैं। इनमें निजी बैंकों से कर्ज लेने के अलावा टोल टैक्स के अधिकार बेचने के बदले एकमुश्त बड़ी रकम जुटाना जैसा विकल्प शामिल है।  एक्सप्रेस-वे के लिए 7200 हेक्टेयर जमीन खरीदी जाएगीयह एक्सप्रेसवे 594 किमी का है। इस पर करीब 38 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए 12 जिलों की करीब  7200 हेक्टेयर जमीन खरीदी जाएगी। जमीन खरीद पर करीब 9500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 24,091 करोड़ रुपये सिविल निर्माण  पर  खर्च होंगे।