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बुद्धि संसार में और मन भगवान मे हो- उमाशंकर व्यास

लखनऊ। निज संवाददातानया हनुमान मन्दिर अलीगंज में चल रही राम कथा के छठे दिन बुधवार को पंण्डित राम किंकर उपाध्याय के शिष्य उमाशंकर व्यास ने कहा कि भगवान को सेवक से बढ़कर कोई प्रिय नही है। भगवान कहते हैं कि मै नाता भी मानता हूं तो भक्ति के नाते से। शबरी प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि शबरी ने भगवान राम से कहा कि प्रभु मैं तो नीच जाति की नारी हूं मेरा आपसे कोई नाता कैसे हो सकता है। क्योंकि संसार में जाति, पाति, धन, कुल, धर्म आदि का नाता समाज स्वीकार करता है। मेरे पास तो इनमें से कुछ नही है। तब भगवान श्रीराम ने समाज के प्रचलित दस नातो की योग्यता को नकारते हुये कहा कि शबरी में इन दस नातों को नही मानता मेरी दृष्टि में तो केवल एक नाता ही सर्वश्रेष्ठ है। ‘‘मानउ एक भगत के नाता कथारिषी कहते हैं कि जीव को भगवान ने जो बुद्धि दी है वह तो संसार में प्रयोग करने के लिए दी है। न कि भगवान में प्रयोग करने के लिए। जैसे दिन में सूर्य के प्रकाश में कार्य करता है। मानों सूर्य साक्षात भगवान है। यदि कोई व्याक्ति यह कहे कि जरा दीपक लेकर जाओं और देखकर बताओं कि क्या सूर्य निकल आया है तो उसकी बुद्धि को क्या कहा जायेगा, अरे बुद्धि रुपी दीपक का प्रयोग तो मोह रुपी रात के अंधेरे को प्रकाश करके उजाले में कार्य करने हेतु किया जाता है और जब बुद्धि का प्रयोग ईश्वर की लीला को समझने में करना है तो पहले बुद्धि को परिमार्जित करिये। कथा का गुरुवार को शाम 7:30 से रात 9 बजे तक होगी।

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