जटिल प्रसव में तत्काल मिलेगी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा

Feb 14, 2026 08:39 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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Lucknow News - प्रदेश में आपातकालीन प्रसव सेवाओं को मजबूत करने के लिए 24 घंटे कार्यरत फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) की संख्या बढ़ाई गई है।

जटिल प्रसव में तत्काल मिलेगी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा

प्रदेश में आपातकालीन प्रसव सेवाओं को मजबूत करने के लिए 24 घंटे कार्यरत फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) की संख्या 153 से बढ़ाकर 427 कर दी गई है। इससे जटिल प्रसव मामलों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जा सकेगी। माताओं और बच्चों की सेहत बेहतर बनाने के लिए अब से हर तीन महीने में सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इनमें अच्छा काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों और चैंपियंस को बुलाया जाएगा, ताकि उनके अनुभव से दूसरों को भी सीख मिल सके। प्रदेश में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से राज्य टास्क फोर्स की बैठक में यह बातें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहीं।

बैठक में डा. मिलिंद वर्धन, महाप्रबंधक बाल स्वास्थ्य ने बताया कि सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे 2023 के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 141 प्रति एक लाख, नवजात मृत्यु दर 26 प्रति एक हजार और शिशु मृत्यु दर 37 प्रति एक हजार हो गई है। प्रसव के दौरान यदि गुणवत्तापूर्ण देखभाल पर ध्यान दिया जाए तो लगभग 46 प्रतिशत मातृ मृत्यु दर, 40 प्रतिशत नवजात मृत्यु तथा 40 प्रतिशत मृत जन्म को रोका जा सकता है। साथ ही गंभीर रूप से बीमार शिशुओं की बेहतर देखभाल से उनमें लगभग 30 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है। वहीं घर पर नवजात शिशुओं की नियमित देखभाल और फॉलो-अप से लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक शिशुओं की मृत्यु में कमी लायी जा सकती है। इन्हीं के संबंध में बैठक में अहम निर्णय लिए गए। बैठक में अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा. अजय गुप्ता ने नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) और न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया। प्रीमैच्योर बच्चों के इलाज के लिए सीपीएपी सुविधा बढ़ाने और इन इकाइयों में 24 घंटे जांच सेवाएं उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा ‘मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट’ (एमएनसीयू) मॉडल को बढ़ावा देने पर भी निर्देश दिए गए, जिससे जन्म के बाद मां और बच्चे को अलग न रखते हुए संयुक्त देखभाल प्रदान की जा सके। बैठक में मिशन निदेशक, एनएचएम की मिशन निदेशक, प्रबंध निदेशक (यूपीएमएससीएल), महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, महानिदेशक (परिवार कल्याण), महानिदेशक, प्रशिक्षण, अपर निदेशक (आरसीएच), महाप्रबंधक (बाल स्वास्थ्य) और कई राज्य स्तरीय अधिकारी व सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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