धर्म-अधर्म के बीच फंसे दानवीर के अंतद्वंद्ध ने झकझोरा
Lucknow News - -स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह में नाटक रश्मिरथी का मंचन लखनऊ, कार्यालय संवाददाता भारतेन्दु नाट्य अकादमी

भारतेन्दु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह में शुक्रवार को बीएम शाह प्रेक्षागृह में मानवीय संवेदनाओं, नैतिकता और संघर्ष की एक विराट प्रस्तुति देखने को मिली। गोरखपुर की संस्था सांस्कृतिक संगम की ओर से मंचित इस नाटक ने दर्शकों को न केवल पौराणिक काल की स्मृतियों में डुबोया बल्कि वर्तमान समाज के लिए कई प्रासंगिक प्रश्न भी खड़े किए। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की सुप्रसिद्ध रचना पर आधारित यह मंचन एक ऐसे उपेक्षित नायक कर्ण की कहानी है, जिसने जन्म से लेकर मृत्यु तक केवल सामाजिक विषमता और संघर्ष का सामना किया।नाटक में गुरु-शिष्य परंपरा, अविवाहित मातृत्व की सामाजिक चुनौती और धर्म-अधर्म के बीच फंसे एक दानवीर के अंतर्द्वंद को बहुत ही मार्मिक ढंग से उकेरा गया है।
लेखक ने पात्र के सामाजिक और पारिवारिक सम्बन्धों को नये सिरे से जांचा है, चाहे वह परशुराम के साथ गुरु-शिष्य का रिश्ता हो या कुंती के साथ मातृत्व का बोध। यह प्रस्तुति सिद्ध करती है कि इंसान की महानता उसके कुल या जन्म से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, नैतिकता और कर्मों से तय होती है। लगभग 1 घंटा 10 मिनट की इस अवधि में वीर, रौद्र, करुण और वात्सल्य रसों का ऐसा जीवंत प्रवाह दिखा कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। मानवेन्द्र त्रिपाठी के निर्देशन में नाटक ने तकनीकी और रचनात्मक दोनों स्तरों पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। स्वयं मुख्य भूमिका निभा रहे त्रिपाठी के साथ-साथ कृष्ण, कुंती और परशुराम जैसे पात्रों ने अपनी संवाद अदायगी से मंच पर प्राण फूंक दिए। पार्श्व संगीत, ध्वनि और रंगदीपन के सटीक समन्वय ने युद्ध के मैदान से लेकर भावनात्मक दृश्यों तक को जीवंत बनाया। मंच पर रविन्द्र रंगधर, नवनीत जयसवाल, शरद श्रीवास्तव, प्रमोद सिंह, राज मौर्य, आलोक सिंह, महेश तिवारी, शिवा श्रीवास्तव, राधेश्याम, आकांक्षा, अखिलेश, चन्द्र प्रकाश, रितिका, पूर्णिता, मोनी व अन्य ने अभिनय किया।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


