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मेरठ व इटावा के छात्रवृत्ति घोटाले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश

दोनों जिलों के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, प्रधानाचार्य व प्रबंधक होंगे नामजद - दो दर्जन से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों आएंगे दायरे मेंप्रमुख संवाददाता-राज्य मुख्यालयशासन ने वर्ष 2008-09 के दौरान इटावा और वर्ष 2010-11 के दौरान मेरठ में हुए छात्रवृत्ति घोटाले में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। इन दोनों जिलों में हुए घोटाले की जांच यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने की है। ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच के आधार पर गृह विभाग से एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। एफआईआर तत्कालीन बीएसए व समाज कल्याण अधिकारियों समेत दो दर्जन से ज्यादा लोगों के खिलाफ हो सकती है।प्रमुख सचिव गृह अरविन्द कुमार ने बताया कि ईओडब्ल्यू को दोनों जिलों के सभी 109 मामलों में एफआईआर दर्ज कर के आरोपियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की अनुमति दे दी गई है। इसमें 23 मामले मेरठ के और 86 मामले इटावा के हैं। अब तक की जांच में आरोपी के रूप में सामने आए अधिकारियों, प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों को एफआईआर में नामजद करते हुए कार्रवाई की जाएगी। फंसेंगे बीएसए और जिला समाज कल्याण अधिकारीउधर, ईओडब्ल्यू से मिली जानकारी के अनुसार घोटाले में दोनों जिलों में तैनात रहे तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी व जिला विकलांग कल्याण अधिकारी के अलावा संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रबंधक नामजद किए जाएंगे। इटावा में वर्ष 2008-09 के दौरान और मेरठ में वर्ष 2010-11 के दौरान तैनात रहे इन विभागों के अधिकारी दायरे में आएंगे। 200 की जगह दो हजार की ली छात्रवृत्तिजांच में पता चला कि स्कूलों में क्षमता से भी अधिक प्रवेश दिखाकर छात्रवृत्ति हड़पी गई है। जिस विद्यालय की क्षमता 200 छात्रों की भी नहीं थी, वहां दो हजार छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई। मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद आई तेजीमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी पुलिस की जांच एजेंसियों के पास लंबित जांचों की समीक्षा की थी और उनका समयबद्ध निस्तारण करने का निर्देश दिया था। उनके निर्देश के बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) ने भी कई मामलों में एफआईआर दर्ज कराई। समीक्षा में पता चला था कि 561 अफसरों के खिलाफ जांचें लंबित हैं। इन जांचों को पिछली सरकारों ने रोक रखा था। मुख्यमंत्री ने ऐसे मामलों में होने वाली कार्रवाई की नियमित समीक्षा के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन भी किया है।

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  • Web Title:EOW allowed to register FIR