अनपरा ई-ओबरा डी परियोजनाएं उत्पादन निगम को सौंपने की मांग
Lucknow News - -संघर्ष समिति बोली ज्वाइंट वेंचर खत्म न किया तो 50 पैसे यूनिट

लखनऊ, विशेष संवाददाता विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली की लगातार बढ़ती डिमांड को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनपरा ई और ओबरा डी परियोजनाओं का ज्वाइंट वेंचर समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने इन्हें तत्काल उत्पादन निगम को देने को कहा है। संघर्ष समिति ने शुक्रवार को कहा है कि परियोजना शुरू न होने से इनकी लागत भी बढ़ेगी और बिजली उत्पादन लागत भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा है कि उत्पादन निगम की तुलना में ज्वाइंट वेंचर में इन परियोजनाओं को बनाने से कम से कम 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट महंगी बिजली मिलेगी। उधर, पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में 289 दिन भी आंदोलन जारी रहा।
इसी क्रम में शुक्रवार को प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों ने विरोध सभा कर आक्रोश व्यक्त किया। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश कैबिनेट ने जुलाई 2023 में 2×800 मेगावॉट क्षमता की आनपारा ई और 2×800 मेगावॉट क्षमता की ओबरा डी परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर में मेजा थर्मल प्राइवेट कम्पनी को देने का निर्णय लिया था। विद्युत उत्पादन निगम और मेजा थर्मल के साथ ओबरा डी परियोजना का ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट सितंबर 2023 में और अनपरा ई परियोजना का एग्रीमेंट अप्रैल 2024 में हस्ताक्षरित कर लिया गया था। किन्तु अभी तक कोई काम नहीं शुरू हुआ है। संघर्ष समिति ने बताया कि एग्रीमेंट के तहत ओबरा डी परियोजना की लागत 17985 करोड़ रुपये और आनपारा ई परियोजना की लागत 18624 करोड़ रुपये रखी गई है। मगर 2 साल बाद भी इन दोनों परियोजनाओं पर कोई काम नहीं शुरू हुआ है। इसका दुष्परिणाम यह होगा कि परियोजनाओं की लागत बढ़ जाएगी और निर्धारित अवधि 50 माह में परियोजनाओं के पूरा न होने से से प्रदेश को बिजली नहीं मिल पाएगी। संघर्ष समिति ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का फैसला निरस्त होने और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
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