
बिजली कर्मचारियों ने की बिजली संशोधन बिल वापस लेने की मांग
Lucknow News - - विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने लगाया आरोप कि इस संशोधन बिल से पूरे
बिजली कर्मचारियों ने बिजली संशोधन बिल-2025 वापस लेने की मांग की है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने इसके खिलाफ आंदोलन चलाने की घोषणा की है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि सरकार इस संशोधन बिल से पूरे ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण करना चाहती है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने 9 अक्तूबर को बिल का प्रारूप जारी किया है और इस पर सभी हितधारकों से सुझाव और शिकायतें मांगी हैं। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि मुंबई में तीन नवंबर को बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक होगी। उसमें इस प्रस्तावित बिल के विरोध के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
उसी बैठक में निजीकरण के विरोध को तेज करने पर भी फैसला होगा। उन्होंने कहा कि संशोधन बिल की धारा 14, 42 और 43 के माध्यम से निजी कंपनियों को अधिकार दिया जा रहा है कि वह सरकारी विद्युत वितरण कंपनियों का नेटवर्क इस्तेमाल कर बिजली की आपूर्ति कर सकेंगे और इसके एवज में वे सरकारी बिजली कंपनियों को व्हीलिंग चार्ज देंगी, जो नाम मात्र का होगा। उन्होंने बताया कि संशोधन बिल की धारा 61 (जी) में संशोधन करके अगले पांच साल में 5 वर्ष में क्रॉस सब्सिडी समाप्त करने की बात लिखी है। किसानों को 5 हॉर्स पावर के पंप के लिए कम से कम 12,000 रु/माह बिजली बिल का भुगतान करना पड़ेगा। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें कम से कम 8 रु से 10 रु प्रति यूनिट हो जाएगी।

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