
बिजलीकर्मी बोले इलेक्ट्रिसिटी संशोधन बिल स्वीकार नहीं
संक्षेप: Lucknow News - -ड्राफ्ट बिल पर केंद्रीय विद्युत मंत्री को पत्र भेज दर्ज कराई आपत्तियां
बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों के संगठनों ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को अस्वीकार्य बताते हुए केन्द्रीय विद्युत मंत्री को अपने कमेंट भेजे हैं। इसमें कहा गया कि निजीकरण का कोई भी स्वरूप स्वीकार्य नहीं है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, बिजली कर्मियों के सभी राष्ट्रीय फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को समग्रता में अस्वीकार्य बताया है। केन्द्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर को ड्राफ्ट बिल 2025 पर गुरुवार को भेजे गए पत्र में लिखा गया है कि एनडीए सरकार में यह छठी बार इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल लाया गया है। हर बार इसे व्यापक विरोध के चलते वापस लिया गया है।

संघर्ष समिति पदाधिकारियों ने कहा कि नया बिल भी पूर्व में लाए गए पांच बिलों जैसा ही है और इसका उद्देश्य संपूर्ण पॉवर सेक्टर का निजीकरण करना है। उन्होंने बताया कि 9 दिसंबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चे के साथ हुए समझौते में तत्कालीन कृषि सचिव ने लिखित दिया था कि किसानों और स्टेक होल्डर्स को विश्वास में लिए बिना इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल नहीं लाया जाएगा, यह उसका सरासर उल्लंघन है। पैसा लगाएगी सरकार, लाभ कमाएंगी निजी कंपनियां संघर्ष समिति ने बताया कि बिल में सेक्शन 14, 42 और 43 के माध्यम से निजी कंपनियों को सरकारी क्षेत्र के नेटवर्क का इस्तेमाल करने की अनुमति देना बैक डोर प्राइवेटाइजेशन है। सरकारी कंपनी नेटवर्क के परिचालन, अनुरक्षण, अपग्रेडेशन और उसके उच्चीकरण पर सारा पैसा खर्च करेगी और इस नेटवर्क का लाभ उठाकर पैसा कमाएंगी प्राइवेट कंपनियां। सेक्शन 86 ई के माध्यम से राज्य के विद्युत नियामक आयोग के सदस्यों को हटाने का अधिकार केंद्र सरकार को देना सीधे-सीधे राज्य के अधिकार में दखल है जबकि बिजली संविधान की समवर्ती सूची में शामिल है। राज्य के अधिकारों के हनन का आरोप संशोधन की धारा 166 ए में केंद्रीय इलेक्ट्रिसिटी काउंसिल बनाने का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से केंद्र सरकार राज्यों को बिजली के मामले में निर्देश दे सकेगी। यह भी समवर्ती सूची में प्रदत्त राज्य सरकारों के अधिकार के विरुद्ध है। संघर्ष समिति ने कहा कि क्रॉस सब्सिडी समाप्त करने से किसानों, गरीबों और घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली की कीमतों में इतनी वृद्धि हो जाएगी कि वे उसे खरीद पाने में सक्षम नहीं होंगे। संघर्ष समिति के आह्वान पर लगातार 344 वें दिन भी निजीकरण के विरोध में आंदोलन जारी रहा।

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