DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   उत्तर प्रदेश  ›  लखनऊ  ›  संपादित: रास नहीं आई राजधानी, शुरू करेंगे अपने काम की कहानी

लखनऊसंपादित: रास नहीं आई राजधानी, शुरू करेंगे अपने काम की कहानी

हिन्दुस्तान टीम,लखनऊPublished By: Newswrap
Fri, 16 Apr 2021 09:40 PM
संपादित: रास नहीं आई राजधानी, शुरू करेंगे अपने काम की कहानी

संपादित: रास नहीं आई राजधानी, शुरू करेंगे अपने काम की कहानी

लखनऊ। प्रमुख संवाददाता

पिछली बार जब लॉकडाउन लगा था तो रोहित, अजय, सुखराज और रामदेव अयोध्या में अपने घर लौट गए थे। हालत सुधरी तो फिर राजधानी में काम करने आ गए। इस बार फिर स्थितियां खराब होती देख ये सभी वापस घरों को लौट रहे हैं। इस बार फर्क यह है कि पिछली बार इन्हें लग रहा था कि इनका सब छिन गया। पर इस बार इनका हौसला बुलंद है। अपने साथ स्क्रीन प्रिटिंग का सामान और कागज के लिफाफे बनाने की डाइयां ले जा रहे हैं। कहते हैं कि अब अपने घर पर खुद अपना काम करेंगे और अगल-बगल के लोगों को भी काम सिखाएंगे।

फिर दुश्वारियां नहीं झेलना चाहते

पॉलीटेक्निक चौराहा और मड़यिांव थाने के सामने कई ऐसे परिवार नजर आए जो अपनी गृहस्थी समेटे बसों का इंतजार कर रहे थे। ये दुकानों और छोटे-मोटे कारखानों में काम करते हैं। राजधानी के एक बडे कारखाने में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने वाले जय किशोर बताते हैं कि पिछली बार उन्होंने बहुत मुश्किल झेली थी। भूखों मरने की नौबत आ गई थी। वह परिवार समेत अपने घर गनेरा (अटरिया) लौट गए थे। थोड़ी बहुत खेती थी उसी में सब्जियां बोते और उन्हें बेचकर खर्च चलाते थे। बड़ा सुकून था। पर मालिक ने दीपावली पर फिर बुला लिया। अब उन्हें लग रहा है कि फिर लॉकडाउन लगेगा। वह कहते हैं कि स्थितियां बिगड़ें इससे पहले घर लौट जाएं तो ठीक रहेगा।

खुद करेंगे अपना काम

लोहिया पथ पर सुस्ता रहे अयोध्या के सुखराज और रामदेव ने बताया कि पिछली बार लॉकडाउन में मकान का किराया नहीं दे पाए थे। मकान मालिक ने निकाल दिया था। पैदल चलकर वह किसी तरह अयोध्या पहुंचे थे। सभी राजधानी में स्क्रीन प्रिंटिंग का काम करते हैं। शादी-ब्याह के कार्ड छापते हैं। उनके पास जो पैसे थे उससे उन्होंने स्क्रीन प्रिटिंग के लिए फ्रेम, स्याही, रसायन आदि खरीदे हैं। अब लखनऊ नहीं लाटेंगे। खुद का काम करेंगे।

अनूप करेंगे कचहरी में काम

अनूप राजधानी में रहकर मिनरल वाटर का काम करते थे। छोटे-मोटे होटलों, रेस्टोरेंट और ठेले वालों को पानी बेचते थे। पिछले लॉकडाउन में उनका काम बंद हो गया था। दोस्तों और रिश्तेदारों से पैसा लेकर पिछले साल अक्तूबर में फिर काम शुरू किया था। पर उनका काम पहले जैसे नहीं चला। अनूप ने बताया कि बाजार फिर बंद होने लगे हैं। तीन दिन पहले ही उन्होंने अपनी गृहस्थी का सामान महमूदाबाद पहुंचा दिया है। शुक्रवार को वह मोटरसाइकिल पर बैठकर पत्नी और बेटी के साथ महमूदाबाद के लिए रवाना हुए। उन्होंने बताया कि राजधानी में रहना, बच्चों को पढ़ाना, मकान किराया देना अब उनके बस की बात नहीं है। अब गांव में कुछ काम करेंगे। वह गुड़ बनाने के अपने बंद बड़े कारखाने को फिर से चालू करेंगे।

संबंधित खबरें