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पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी के ठिकानों पर ईडी का छापा, पूछताछ जारी

-बैंकों के साथ 750 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में दर्ज है मनी लांड्रिंग का

पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी के ठिकानों पर ईडी का छापा, पूछताछ जारी
हिन्दुस्तान टीम,लखनऊFri, 23 Feb 2024 06:50 PM
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-बैंकों के साथ 750 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में दर्ज है मनी लांड्रिंग का केस

-ईडी ने पिछले साल जब्त की थीं 72 करोड़ की संपत्तियां

-गोरखपुर में बड़े भाई समेत अन्य रिश्तेदारों से हुई पूछताछ

लखनऊ, प्रमुख संवाददाता

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को पूर्व मंत्री स्व. हरिशंकर तिवारी के बेटे और सपा के पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी के गोरखपुर, लखनऊ व दिल्ली समेत अन्य ठिकानों पर एक साथ छापा मारा।

गोरखपुर में तिवारी का हाता के नाम से मशहूर उनके आवास पर ईडी की टीमों के पहुंचते ही हड़कंप मच गया। पुलिस के अलावा केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के साथ पहुंचे ईडी के अफसरों ने मौके पर मिले विनय शंकर तिवारी के बड़े भाई एवं पूर्व सांसद भीष्म शंकर तिवारी समेत अन्य करीबी रिश्तेदारों से पूछताछ की।

गोरखपुर आवास पर ईडी की जांच और पूछताछ सुबह पांच बजे ही शुरू हो गई थी और शाम तक जारी रही। ईडी मुख्य आरोपी विनय शंकर से नोएडा में पूछताछ कर रही है। यह कार्रवाई बैंकों के साथ 750 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में हुई है। इससे पहले ईडी ने 17 नवंबर 2023 को विनय शंकर ‌और उनके परिवार की 72.08 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया था। विनय शंकर और उनके करीबी रिश्तेदारों के विरुद्ध दर्ज मनी लॉड्रिंग के केस में यह कार्रवाई हुई थी। ये संपत्तियां कई शहरों खासकर लखनऊ, गोरखपुर व महराजगंज जिले में हैं। विनय शंकर चिल्लूपार (गोरखपुर) से वर्ष 2017 में बसपा के विधायक रहे हैं। उनके पिता स्व. हरिशंकर तिवारी का राजनीति में लंबे समय तक दबदबा रहा। पिछले साल उनका निधन हो गया था।

बैंकों से लिया था 1129 करोड़ लोन

मेसर्स गंगोत्री इंटरप्राइजेज लिमिटेड नामक जिस कंपनी के मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल होने के कारण यह कार्रवाई की गई है, वह विनय शंकर और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर पंजीकृत है। वे सभी निदेशक, प्रमोटर व गारंटर के रूप में कंपनी से जुड़े हैं। कंपनी के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज है। सीबीआई नई दिल्ली द्वारा कंपनी के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने यह जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि गंगोत्री इंटरप्राइजेज लिमिटेड ने अपने प्रमोटरों, निदेशकों व गारंटरों के साथ मिलकर धोखाधड़ी से बैंक की क्रेडिट सुविधाओं का लाभ उठाया। कंपनी ने बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व में सात बैंकों के कन्सोर्टियम से 1129.44 करोड़ रुपये लोन लिया। बाद में इस बैंक लोन का पूर्ण भुगतान नहीं किया गया। इतना ही नहीं कंपनी द्वारा बड़े पैमाने पर धन का ‘डायवर्जन कर उसका दुरुपयोग किया गया। जांच में पता चला कि गंगोत्री एंटरप्राइजेज लिमिटेड और उसके प्रमोटरों, निदेशकों व गारंटरों ने बैंकिंग मानदंडों का उल्लंघन करते हुए बैंकों के कन्सोर्टियम को 754.24 करोड़ रुपये की चपत लगाई।

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