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15 अगस्त, 2020|10:04|IST

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जिला कमेटियों के गठन में छानबीन की लंबी प्रक्रिया पर गड़बड़ी भारी

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कांग्रेस की जिला- शहर कमेटियों में कहीं एक आदमी की तैनाती दो पदों पर तो कहीं जिला अध्यक्ष को भी नहीं मालूम सूची में किसका नाम है? जिला-शहर पदाधिकारियों की सूची में इस तरह की तमाम गड़बड़ियां छह माह से अधिक समय से चल रही गठन की प्रक्रिया और छानबीन की भारी भरकम व्यवस्था पर भारी है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस इसे कहीं टाइपिंग त्रुटि या मानवीय भूल से ज्यादा कुछ मानने को तैयार नहीं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने दो दिन पहले 62 जिला-शहर कमेटियों की घोषणा की थी। जिलों में जब कमेटियों की घोषणा का वक्त आया तो कई जिलों में अलग-अलग तरह की गड़बड़ियां सामने आईं। मसलन- सिद्धार्थनगर और संतकबीर नगर की कमेटियों में एक ही नाम दो पदों के लिए था। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक जिले में तो कमेटी की घोषणा एक दिन इसीलिए रोक दी गई कि एक पदाधिकारी का नाम ऐसा था, जिसकी दो माह पहले मृत्यु हो गई थी।

हालांकि दूसरे दिन बताया गया कि एक ही नाम के दो लोग होने के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हुई। इसी जिले के एक पड़ोस के जिले में एक नाम के बारे में खुद जिला अध्यक्ष को मालूम नहीं था, कि इस नाम का कोई नेता पार्टी में है। हरदोई, उन्नाव, बांदा, सोनभद्र समेत कई जिलों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके नेताओं ने जिला कमेटी में रखे जाने पर आपत्ति की। कई जिलों में आपत्ति करने वाले पदाधिकारियों द्वारा पद से इस्तीफा दिए जाने की खबर है।

छानबीन की लंबी प्रक्रिया

इस बार कमेटियों के गठन में काफी सर्तकता बरतने के दावे किये गए हैं। करीब एक दर्जन स्तर पर छानबीन के बाद छह माह की लंबी प्रक्रिया के बाद कमेटी घोषित की गई है।

टाइपिंग त्रुटि, कोई असंतोष नहीं

प्रदेश प्रभारी प्रशासन सिद्धार्थ प्रिय श्रीवास्तव ने कहा कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। टाइपिंग त्रुटि दो-तीन जगह हुई है। कहीं कोई असंतोष की खबर नहीं है।

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  • Web Title:Disturbances on long process of investigation in formation of district committees