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आयुर्वेद चिकित्सा में डाक्टरों को परंपरा से हटना होगा-राज्यपाल

- राम नाईक ने औषधीय पौधों की वाटिकाओं का विस्तार पूरे प्रदेश में करने पर जोर दिया - आयुर्वेद का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाना है -डा. धर्म सिंह सैनीविशेष संवाददाता - राज्य मुख्यालयराज्यपाल राम नाईक ने कहा है कि आयुर्वेद चिकित्सा में डाक्टरों को परपंरा से हटकर नई दिशा देनी होगी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद नया विषय नहीं बल्कि देश की हजारों वर्ष पुरानी पद्धति है जिसका विशेष महत्व अब तक स्थापित नहीं किया गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अलग विभाग बनाकर उसके महत्व का अहसास कराया है। राज्यपाल मंगलवार को राजभवन स्थित गांधी सभागार में धन्वंतरि जयंती पर प्रदेश के आयुर्वेद विभाग द्वारा आयोजित आयुर्वेद के द्वारा वेदना निवारण संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने योग को भी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में पहचान दिलाकर सम्मान दिलाया। राज्य सरकार ने भी अलग से आयुष विभाग का गठन किया है। केंद्र और राज्य सरकार के एक दिशा में चलने पर जहां आयुर्वेद का महत्व बढ़ेगा वहीं स्वास्थ्य के क्षेत्र में आम आदमी को लाभ मिलेगा। आयुर्वेद में स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और बीमारी होने पर ही औषधि देने की जरूरत कही गई है। हमें आयुर्वेद के नियमों के अनुसार स्वास्थ्य रक्षा पर अधिक जोर देने की जरूरत है। संगोष्ठी में आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. धर्म सिंह सैनी ने सादगी पूर्ण आचार-व्यवहार का उल्लेख करते हुए कहा कि अन्त्योदय की तर्ज पर आयुर्वेद का लाभ भी समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाना है। प्रदेश सरकार इस पद्धति को पूरा प्रोत्साहन देगी। संगोष्ठी में सचिव आयुष सुधीर दीक्षित, आयोजन समिति के अध्यक्ष डा.शिवशंकर त्रिपाठी, सचिव डा.बृजेश गुप्ता, डा. केके ठकराल, डा.बीआर त्रिपाठी, डा.संजीव रस्तोगी ने प्रमुख रूप से भाग लिया।

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  • Web Title:dhanvantri jayanti in governor house