बलरामपुर:महाशिव रात्रि पर जलाभिषेक के लिए उमड़े श्रद्धालु
Lucknow News - बलरामपुर में महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में जलाभिषेक के लिए कतार में खड़ी रहीं और मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया। झारखंडी मंदिर में सबसे अधिक भीड़ थी, जहां दर्शन से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

बलरामपुर संवाददाता । बलरामपुर में महाशिवरात्रि के मौके पर जिले भर के शिव मंदिरों में आस्था का जन सैलाब उमड़ता दिखाई पड़ा। भोर से श्रद्धालु बिभिन्न शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए कतार बद्ध हो गए थे। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में घंटों लाइन में खड़ी रहीं और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच भगवान शिव का जलाभिषेक किया। कई स्थानों पर महिलाएं कतारों में खड़े होकर कलश से जल अर्पित करती नजर आईं। मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और आकर्षक झांकियों से भव्य रूप से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। भीड़ को देखते हुए मंदिरों पर सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किए गए थे।
शहर के प्रसिद्ध झारखंडी मंदिर में सबसे अधिक भीड़ देखी गई। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग अत्यंत प्राचीन है और सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है। वहीं झारखंडेश्वर मंदिर अपनी अनूठी स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि सावन और महाशिवरात्रि पर यहां जल चढ़ाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर का नाम इसके प्राकृतिक परिवेश के कारण पड़ा। वहीं दुखहरन नाथ मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से दुखों का निवारण होता है।रोचक तथ्य यह है कि महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है, जिसमें रात भर रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन चलता है। पुराणों के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। बलरामपुर में उमड़ी आस्था की यह लहर न केवल धार्मिक उत्साह का प्रतीक बनी, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी पेश कर गई।
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