DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

देवरिया कांड: पुलिस-प्रशासन में तालमेल की कमी 

देवरिया जिले के नारी संरक्षण गृह में रहने वाली नाबालिग लड़कियों से देह व्यापार कराए जाने के मामले की जांच शुरू होने के बाद नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इस मामले में भी पुलिस व प्रशासन में तालमेल की कमी सामने आई है। ऐसे में प्रशासन के आदेशों की अवहेलना पुलिस की मजबूरी मानी जा रही है।
 
नाबालिग बच्चियों को कहां ले जाए पुलिस :
 घर से खुद भागकर या किसी के द्वारा बहला-फुसलाकर भगा ली जाने वाली नाबालिग लड़कियों के पकड़े जाने पर पुलिस के सामने उन्हें कहीं सुरक्षित रखने की समस्या होती है? पुलिस उन्हें थाना परिसर में नहीं रख सकती। कानूनी प्रावधानों के अनुसार उन्हें केवल सरकारी या सरकारी मान्यता प्राप्त नारी संरक्षण गृह में ही रखा जा सकता है। सितंबर 2017 में देवरिया के मां विन्ध्यवासिनी नारी संरक्षण गृह की मान्यता समाप्त कर दिए जाने का आदेश जिलाधिकारी के स्तर से जारी तो कर दिया गया था, लेकिन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कराई गई थी। ऐसे में देवरिया पुलिस को उन्हें कम से 100 किलोमीटर दूर स्थित दूसरे जिले के किसी नारी संरक्षण गृह में भेजना पड़ता। फिर मेडिकल परीक्षण और मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के लिए वहां से ले आना और ले जाना भी एक बड़ी चुनौती होती। 
एक पुलिस अधिकारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार थानाध्यक्ष अपने व्यक्तिगत प्रयासों से ऐसी लड़कियों को अस्पताल में भर्ती कराते हैं, या फिर महिला सिपाहियों के साथ बैरक में रुकवाकर कानूनी प्रक्रिया पूरी कराते हैं। हालांकि कोई भी अप्रिय घटना होने पर यह प्रयास उनकी नौकरी को खतरे में डाल सकता है। देवरिया की घटना के बाद पहली बार इस व्यावहारिक कठिनाई पर उच्च स्तर पर विचार हो रहा है। मुख्यमंत्री के साथ गृह व महिला कल्याण विभाग के अधिकारियों की बैठक में भी यह मुद्दा उठा। शायद यही वजह है कि डीएम को सबसे पहले जिम्मेदार माना गया। 
महिला कल्याण विभाग कठघरे में  
प्रदेश में निराश्रित महिलाओं, बच्चों के लिए महज 58 संरक्षण गृह हैं। मंडल मुख्यालय पर नारी संरक्षण गृह नहीं है। महिला कल्याण विभाग ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया। सामाजिक कार्यकर्ता विश्व विजय सिंह कहते हैं कि इस मामले में महिला कल्याण विभाग के अफसरों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। 
डीएम की रिपोर्ट पर मंथन
जिलाधिकारियों द्वारा नारी व बाल संरक्षण गृहों का निरीक्षण करके भेजी गई रिपोर्ट पर शासन मंथन कर रहा है। इस रिपोर्ट के माध्यम  से सामने आई कमियों के आधार  पर कुछ नीतिगत निर्णय भी लिए जाएंगे।  

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Deoria case: lack of coordination between police and administration