DA Image
6 जुलाई, 2020|5:47|IST

अगली स्टोरी

लखनऊ विश्वविद्यालय में रसूख और पैसे के बल पर शिक्षा का सौदा 

lucknow university

लविवि ‘ऑडियो कांड’ और उसमें कुलपति व वरिष्ठ शिक्षकों की भूमिका ने सभी को झकझौर दिया है। पैसे और रसूख के दम पर विवि में हो रहे शिक्षा के धंधे का रैकेट खुलकर सामने आया है। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने पड़ताल की तो और भी चौंकाने वाले सच सामने आए हैं। आलम यह है कि छात्रों के दाखिले कराने, कॉलेज को संबद्धता देने, परीक्षा केन्द्र बनाने, नम्बर बढ़वाने से लेकर पास कराने तक का रैकेट यहां चल रहा है। परीक्षा विभाग, कुलपति कार्यालय से लेकर निजी कॉलेज प्रबंधन तक इसमें शामिल है। एलएलबी में यह खेल सबसे ज्यादा है। 

सवाल -1 : निजी कॉलेज ही क्यों बनते हैं परीक्षा केन्द्र? 

विवि प्रशासन और उसमें बैठे कुछ अधिकारी निजी कॉलेजों पर काफी मेहरबान रहते हैं। सरकारी और सहायता प्राप्त कॉलेजों को किनारे कर गिने चुने निजी कॉलेजों को ही हर परीक्षा में केन्द्र बनाया जाता है। सूत्रों की मानें तो, फैजाबाद रोड पर संचालित कई निजी कॉलेज सिर्फ नकल और पास कराने का ठेका लेकर ही चल रही हैं। इसके लिए विवि के अफसरों से साठगांठ रहती है। 

सवाल-2 : विवि में कोर्स बंद पर निजी कॉलेजों में धड़ल्ले से चल रहे हैं? 

विवि में बंद होते पाठ्यक्रमों के पीछे गुरुजनों और निजी कॉलेजों का गठजोड़ है। अगर, विवि के बीकॉम पाठ्यक्रम में सब प्रवेश हो जाएंगे तो निजी कॉलेज में कौन दाखिला लेगा। बीजेएमसी पाठ्यक्रम को संसाधन की कमी का हवाला देकर विवि से बंद किया। 

सवाल -3 : फर्जी मार्कशीट प्रकरण अभी तक क्यों अनसुलझा है? 

लखनऊ विश्वविद्यालय में फर्जी मार्कशीट का रैकेट खुला। कई गिरफ्तारियां हुईं। कर्मचारी और अधिकारियों के नाम भी सामने आए। आज तक यह पहेली अनसुलझी है। जांच हुई तो कई लोग फंसेंगे। इसलिए सभी चुप्पी साधे बैठे हैं। 

2010 में भी पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द हुई थी

यह पहली बार नहीं है जब जिम्मेदारों की लापरवाही से विश्वविद्यालय की छवि खराब हुई है। इससे पहले 2010 में बीएड का पेपर लीक हुआ था। उस समय बीएड परीक्षा को पूरे प्रदेश में रद्द कर दिया गया था। इस परीक्षा को कराने की जिम्मेदारी लविवि को सौंपी गई थी। 

हर बार निजी कॉलेजों को परीक्षा केन्द्र बनाया जाता है। सरकारी एडेड कॉलेज खाली होने के बाद भी केन्द्र नहीं बनते। फर्जी मार्कशीट का मामला तो दबा ही दिया गया। यह गंभीर प्रकरण है। सरकार को इनपर जांच करानी चाहिए। 
अंकित सिंह बाबू, सपा छात्रसभा  

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Deal of education in Lucknow University on the strength of influence and money