सुगंधित तेलों को बजार तक पहुंचाने में वैज्ञानिक और उद्योग अहम-डा. प्रबोध त्रिवेदी
Lucknow News - सीमैप ने फूलों की खेती और तेल उत्पादन को अंतर्राष्ट्रीय मानक पर लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसमें किसानों, उद्योग और विज्ञान को एकजुट किया जा रहा है ताकि सगंधीय तेल के उत्पादन में गुणवत्ता और मात्रा की स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। उद्योग प्रतिनिधियों ने आवश्यक फसलों पर ध्यान देने का सुझाव दिया है।

फूलों की खेती से लेकर तेल उत्पादन को अंतर्राष्ट्रीय मानक पर पहुंचाने के लिए सीमैप ने बड़ा कदम उठाया है। इस निर्णायक कदम में किसानों, उद्योग और विज्ञान को एक मंच पर लाकर जोड़ा जा रहा है। ताकि सगंधीय तेल के उत्पादन में मात्रा, गुणवत्ता की स्थिरता, ट्रेसबिलिटी और वैश्विक बाजार तक पहुंचा जा सके। उक्त बातें बुधवार को सीएसआईआर के एरोमा मिशन 4.0 पर वैज्ञानिक और उद्योग से जुड़े लोगों की बैठक में सीमैप के निदेशक डा. प्रबोध त्रिवेदी ने कहीं। बैठक का मकसद विज्ञान, उद्योग और नीति समन्वय को सुदृढ़ करना, एरोमा 4.0 के अंतर्गत प्रौद्योगिकी परिनियोजन को गति देना, तथा जलवायु परिवर्तन एवं बाजार चुनौतियों पर मंथन करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ सीमैप के निदेशक डा. प्रबोध त्रिवेदी ने दीप प्रज्वलन के साथ शुरू किया। इस दौरान निदेशक आईएचबीटी डॉ. सुदेश कुमार यादव ने जलवायु-अनुकूल एवं टिकाऊ सुगंध फसलों के विकास पर जोर दिया। एनबीआरआई निदेशक डॉ.अजीत कुमार शासनी पादप विज्ञान एवं जैव विविधता आधारित अनुसंधान को उद्योग से जोड़ने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम का समापन डॉ. आलोक कालरा के धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। उद्योग प्रतिनिधि बोले-जरूरत के फसल पर ध्यान देना जरूरी उद्योग प्रतिनिधियों ने दीर्घकालिक सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए रोजमेरी, पचौली, जेरेनियम, पामारोसा, सिट्रोनेला, गुलाब, कैमोमाइल एवं दवाना जैसी वैश्विक मांग वाली फसलों पर विशेष फोकस करने का सुझाव दिया है। साथ ही जलवायु परिवर्तन, मांग-आधारित किस्म विकास, प्राकृतिक एवं सिंथेटिक सुगंध अणुओं के संतुलन, गुणवत्ता मानकीकरण, प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी तथा बाजार तालमेल जैसी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया।

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