
सड़क हादसे में घायल का ऑक्सीजन स्तर मापे
संक्षेप: Lucknow News - कान्फ्रेंस लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। सड़क दुर्घटना का कोई गंभीर मरीज ट्रॉमा इमरजेंसी में लाया जाए
कान्फ्रेंस लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। सड़क दुर्घटना का कोई गंभीर मरीज ट्रॉमा इमरजेंसी में लाया जाए तो सबसे पहले उसको कॉलर लगाकर ऑक्सीजन का स्तर जांचें। दुर्घटना के बाद गंभीर मरीज का ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। ऐसे में तुरंत ऑक्सीजन लगाना चाहिए। यह जानकारी एरा मेडिकल कॉलेज में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के डॉ. मुस्तहसिन मलिक ने दी। शुक्रवार को एराज मेडिकल कॉलेज में नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ नर्सिंग इमरजेंसी, क्रिटिकल केयर एडं ट्रॉमा एलाइड रिस्पॉन्डर का आयोजन हुआ। डॉ. मुस्तहसिन मलिक ने कहा कि समय पर ऑक्सीजन लगने से मरीज की जिंदगी काफी हद तक बचाई जा सकती है।

उसके बाद मरीज को ड्रिप लगाएं। उसके बाद मरीज का एक्स-रे व सीटी स्कैन कराना चाहिए ताकि पता चल सके कि चोट कहां और कितनी लगी है। डॉ. अंजलि शुक्ला ने कहा कि कि पैरा मेडिकल कर्मियों को कई बार सीने में दर्द की शिकायत पर परिजन मरीज को लेकर अस्पताल आते हैं। उनका कहना होता है कि मरीज को हार्ट अटैक आया है। जरूरी है कि इमरजेंसी में मौजूद पैरा मेडिकल कर्मी दोनों में अंतर को समझें। मरीज की विधिवत जांच करें। परिजनों से पूछें कि मरीज बेहोश तो नहीं हुआ था। क्योंकि हार्ट अटैक आने पर मरीज बेहोश नहीं होता है। अगर दर्द के बाद मरीज बेहोश हो गया है तो उसे कार्डियक अरेस्ट होने की संभावना अधिक होती है। इस मौके पर नर्स व पैरामेडिकल स्टाफ को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देने के तरीका बताया गया। आईसीयू में मरीज की फिजियोथेरेपी कैसे करें दिल्ली एम्स से आए डॉ. बंटी तुलसीराम ने बताया कि आईसीयू में भर्ती मरीजों की रिकवरी में फिजियोथेरेपी की अहम भूमिका है। फिजियोथेरेपी शुरू करने पर मरीजों में मांसपेशियों की कमजोरी कम होती है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर रहती है।

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