
आवास विकास के वास्तुविद नियोजकों ने नक्शों पर छह-छह बार लगायी आपत्ति
संक्षेप: Lucknow News - लखनऊ में आवास विकास के वास्तुविद नियोजकों ने एक पीसीएस अधिकारी का प्लॉट का नक्शा छह बार निरस्त किया। अधिकारियों ने विभिन्न कारणों से नक्शा पास करने में देरी की। अंततः आवास आयुक्त ने मामले की जांच की और वास्तुविद मुकेश कुमार रुहेला को निलंबित कर दिया। विभाग में अब खलबली मच गई है।
जनता का शोषण करने के लिए नक्शे निरस्त कर रहे थे आवास विकास के वास्तुविद नियोजक लखनऊ। विजय वर्मा वृंदावन योजना के अपने प्लाट का नक्शा पास कराने के लिए एक पीसीएस अधिकारी ने आवास विकास में आनलाइन आवेदन किया। लेकिन यहां के वास्तुविद नियोजकों, सहायक नियोजकों ने उनका नक्शा छह बार कोई न कोई कारण दिखाकर निरस्त कर दिया। उन्होंने वास्तुविद कार्यलय में सम्पर्क किया। यहां एक खास आर्किटेक्ट का नाम बताया गया। वह उसके पास पहुंचे। उसने नक्शे की अपनी फीस के अलावा पांच लाख रुपए अतिरिक्त मांगे। हालांकि उन्होंने पैसा नहीं दिया। अपने परिचित अधिकारी से सिफारिश लगवायी।

तब भी उनका नक्शा पास होने में आठ महीने लग गए। पीसीएस अधिकारी के भूखण्ड का नक्शा वास्तुविद नियोजकों ने कभी दाखिल-खारिज पत्र न होने, कभी कब्ज़ा पत्र गायब होने, कभी नक्शे में खामी, तो कभी कागज पढ़ने में न आने का बहाना बनाकर निरस्त किया। वह बार-बार यह गुहार लगाते रहे कि सभी आपत्तियां एक साथ बता दी जाएं, ताकि वह उन्हें पूरा कर सकें, लेकिन हर बार सिर्फ एक आपत्ति आन लाइन लगाकर नक्शा निरस्त कर दिया जाता। इसी तरह गाज़ियाबाद के भी एक अन्य अधिकारी का नक्शा पांच बार निरस्त किया गया। उन्हें मुख्यालय से लेकर गाज़ियाबाद तक डेढ़ साल चक्कर लगाने पड़े। यह एक मामला उदाहरण भर है। यहां बिना वास्तुविद नियोजक, सहायक नियोजक को खुश किए नक्शा पास ही नहीं हो सकता है। आवास आयुक्त डा. बलकार सिंह के पास शिकायत आयी तो उन्होंने सचेत किया था। जांच में पुष्टि के बाद आवास आयुक्त डा. बलकार सिंह ने रुहेला को गुरुवार को सस्पेंड कर दिया। 50 से 70 प्रतिशत तक नक्शे विशेष आर्किटेक्ट के पास हुए परिषद में नक्शा पास कराने का खेल गहरे तक फैला हुआ है। परिषद के कुछ खण्ड में जो नक्शे पास हुए उसमें 50 से 70 प्रतिशत नक्शे सिर्फ तीन आर्किटेक्ट के माध्यम से ही पास कराए गए। सूत्र बताते हैं कि वास्तुविद नियोजक आम लोगों से सीधे उगाही नहीं करते थे, बल्कि अपने पसंदीदा आर्किटेक्ट के ज़रिए पैसे वसूलते थे। उनका बनाया नक्शा आसानी से पास हो जाता था। व्यावसायिक संपत्तियों के नक्शे पास कराने में तो इतना बड़ा लिफाफा सिस्टम चलता था कि कई बिल्डरों की कमर टूट जाती थी। विभाग में मची खलबली, सरगना बचने में कामयाब आवास आयुक्त बलकार सिंह ने विभाग के भीतर से ही निगरानी शुरू की और अंततः इस पूरे खेल की कड़ी मुकेश कुमार रुहेला तक पहुंची। गुरुवार को उन्होंने वास्तुविद नियोजन मुकेश कुमार रुहेला को निलंबित कर दिया। हालांकि इनका सरगना अभी भी बच गया है। आवास आयुक्त की कड़ी कार्रवाई के बाद अब विभाग में खलबली मच गयी है। सभी दहशत में हैं। सहायक प्लानर व ड्राफ्टमैन भी कार्रवाई की जद में आवास आयुक्त डा. बलकार सिंह ने आवास विकास के सहायक प्लानर तथा ड्राफ्टमैन की भूमिका की भी जांच का निर्देश दिया है। यह लोग भी नक्शे पास करने में आवंटियों को परेशान करते थे। जांच रिपोर्ट आने के बाद इनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी। नक्शा पास कराने में किए गए खेल के यह भी हैं कुछ मामले --संदीप चक्रवर्ती (1/1037) वसुंधरा गाजियाबाद के नक्शे पास करने में अनावश्यक आपत्तियां लगाई गईं और प्रक्रिया रोककर उन्हें लगातार परेशान किया गया। --भारत भूषण शर्मा (11/704, वसुंधरा, गाज़ियाबाद) के नक्शे पर भी बिना कारण आपत्तियाँ लगाकर देरी कराई गई और हर बार नया बहाना बनाया गया। --पंकज शर्मा (3/413 वसुंधरा गाजियाबाद) के मानचित्र में बार-बार छोटी-छोटी खामियाँ बताकर उनका आवेदन निरस्त किया गया। --शुभलता शर्मा (5/1335 वसुंधरा गाजियाबाद) को नक्शा पास कराने में कई बार चक्कर लगवाए गए, हर बार अलग कारण बताकर फाइल रोकी गई। --कल्पना जैन (12/501, वसुंधरा, गाज़ियाबाद) के नक्शे में भी इसी तरह लगातार आपत्तियाँ लगाकर प्रक्रिया लंबी खींची गई। तमाम नक्शे कई बार आपत्तियां लगाए जाने के बाद निरस्त किए गए हैं। पहली बार नक्शे जमा होने के बाद उनके पास होने की संख्या नगण्य मिली है। वास्तुविद नियोजक मुकेश कुमार रुहेला को सस्पेंड किया गया है। कई आर्किटेक्ट की भूमिका भी मिली है। इन आर्किटेक्ट की जांच करने के भी निर्देश दिए गए हैं। गड़बड़ी करने वाला कोई भी नहीं बचेगा। डा. बलकार सिंह, आवास आयुक्त

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