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धूम्रपान से 40 प्रतिशत मरीजों को हो रही फेफड़ों की बीमारी

धूम्रपान से 40 प्रतिशत मरीजों को हो रही फेफड़ों की बीमारी

संक्षेप:

Lucknow News - सीओपीडी दिवस पर केजीएमयू के विशेषज्ञों ने साझा की जानकारी लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। धूम्रपान से

Nov 18, 2025 08:25 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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सीओपीडी दिवस पर केजीएमयू के विशेषज्ञों ने साझा की जानकारी लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। धूम्रपान से फेफड़ों की गंभीर बीमारी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। करीब 40 प्रतिशत मरीजों को धूम्रपान की वजह से सीओपीडी हो रहा है। कंडे, उपलों से होने वाला वायु प्रदूषण भी सीओपीडी को बढ़ाता है। जबकि सीओपीडी के लगभग एक-तिहाई मामले गैर-धूम्रपान करने वालों में होते हैं, जो अक्सर व्यावसायिक जोखिम जैसे वायु प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय कारणों से जुड़े होते हैं। यह जानकारी केजीएमयू पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने कही। वह मंगलवार को सीओपीडी दिवस पर डॉ. वेद प्रकाश ने कहा कि सीओपीडी फेफड़ों की लगातार बढ़ने वाली बीमारी है।

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जिससे मरीज को सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इसमें क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और एम्फाइसीमा जैसी स्थितियां शामिल हैं। सीओपीडी वाले लोग अक्सर पुरानी खांसी, सांस की तकलीफ, घरघराहट और सीने में जकड़न जैसे लक्षणों का अनुभव करते हैं। 30 की उम्र के बाद नजर आते हैं लक्षण डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि सीओपीडी के लक्षण 30 वर्ष की उम्र के बाद दिखने शुरू होते हैं। सुबह खांसी आने के साथ इसकी शुरुआत होती है। इसके बाद साल भर खांसी और बलगम भी आने लगता है। बीमारी बढ़ने पर रोगी की सांस भी फूलने लगती है। सीओपीडी से फेफड़े के साथ ही दिल, गुर्दा व अन्य अंग भी प्रभावित होते हैं। इन्हेलर से काबू में आ सकती है बीमारी केजीएमयू रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि देश में करीब 5.5 करोड़ से अधिक लोग सीओपीडी से पीड़ित हैं। महिलाओं में बढ़ती धूम्रपान की प्रवृत्ति और चूल्हे में खाना पकाने की वजह से उनमें यह बीमारी बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इन्हेलर इसका सबसे प्रभावी इलाज है। यह सीधे फेफड़े में पहुंचता है। जबकि बाकी दवाएं खून में जाती हैं। इसलिए इन्हेलर के दुष्प्रभाव भी कम हैं। लक्षण पुरानी खांसी, सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट, सीने में जकड़न, थकान, बार-बार श्वसन संक्रमण होना, अनपेक्षित वजन घटना, दैनिक क्रियाकलाप करने में कठिनाई होना।