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20 सिगरेट का धुंआ पैबस्त हो रहा सीने में

-वातावरण में घुले प्रदूषण के जहर से सांस के मरीजों में बढ़ी बेचैनी

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

वातावरण में घुला प्रदूषण और धुंध बेहद खतरनाक है। सांस ही नहीं सेहतमंद व्यक्ति को भी यह मौसम बीमार बना हा है। इस वातावरण में तीन से पांच घंटे बाहर रहने वाले व्यक्ति के फेफड़े में करीब 20 सिगरेट के बराबर धुंआ पैबस्त हो रहा है। इस वातावरण में सांस के मरीजों की बेचैनी बढ़ गई है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में 25 से 30 प्रतिशत तक सांस के मरीज बढ़ गए हैं। वहीं दिल का दौरा पड़ने के मामलों में बढ़ोत्तरी हो गई है।

बुधवार को सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रेक्टिव पल्मोनरी डिजीज) जागरुकता दिवस है। केजीएमयू पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि वातावरण में धुंध छाई है। इस वजह से प्रदूषण के कण वातावरण के नीचली सतह पर हैं। ऐसे में सांस के जरिए धुंआ और प्रदूषण के कण शरीर में दाखिल हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदूषण के ये करण सबसे पहले सांस की नली में सूजन आ जाती है। फिर नली सिकुड़न शुरू हो जाती है। इसकी वजह से मरीज में बेचैनी शुरू हो जाती है। उसे सांस लेने में परेशानी होती है। धीरे-धीरे मरीज को संक्रमण अपनी जद में लेना शुरू कर देता है। सांस की नली में रूकावट हो जाती है। फेफड़े व दिल समेत दूसरे अंगों पर विपरीत प्रभाव पड़ने लगता है। चूल्हे पर खाना बनाने वाली महिलाओं के सीने में रोजाना 100 बीडी का धुंआ समा रहा है।

एक मिनट में 15 बार सांस लेता है व्यक्ति

इंडियन चेस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि एक मिनट में व्यक्ति 15 बार सांस लेता है। एक बार में आधा लीटर सांस शरीर में जाती है। इस समय वातावरण में प्रदूषण का स्तर काफी है। इस मौसम में अधिक संजीदा रहने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि केजीएमयू पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की ओपीडी में 25 से 30 प्रतिशत मरीज बढ़े हैं।

दिल का दौरा पड़ने के मामले बढ़े

लोहिया संस्थान के कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी ने बताया कि इस समय दिल के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। दिल का दौरा पड़ने के बाद काफी मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं। इसकी एक वजह स्मॉग भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि रोजाना दो से तीन मरीज दिल का दौरा पड़ने की शिकायत के बाद संस्थान आ रहे हैं।

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सांस के रोगी मास्क लगाकर निकले

हर साल पांच लाख सीओपीडी मरीज तोड़ रहे दम

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

सिगरेट, बीडी और चूल्हे का धुआं पांच फीसदी लोगों के फेफड़े व सांस की नली को खराब कर रहा है। इस कारण होने वाली बीमारी सीओपीडी कहते हैं। वरिष्ठ सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी सिंह ने पत्रकार वार्ता में बताया कि धूम्रपान से सांस नली सिकुड़ जाती है। जिससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है। ऊम्र बढ़ने के साथ बीमारी का असर बढ़ता है।

डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि धूम्रपान करने वालों को सुबह के समय खांसी आए और पैरों में सूजन हो तो संजीदा हो जाना चाहिए। ये सीओपीडी के लक्षण हैं। सीओपीडी सिर्फ फेफड़े ही नहीं पूरे शरीर को चपेट में लेता है। फेफड़ों का कैंसर, दिल, खून की नलियों का रोग, हड्डियों में कमजोरी, फेफड़ों का संक्रमण एवं मधुमेह होने की संभावना काफी अधिक होती है। उन्होंने बताया कि बीडी-सिगरेट पीने वाले के शरीर में सिर्फ 30 प्रतिशत जहरीला धुंआ जाता है। बाकी 70 प्रतिशत धुंआ वातावरण में रहता है। सामान्य व्यक्ति सांस के जरिए इस नुकसानदेह धुंआ लेता है। केजीएमयू क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि सीओपीडी से जूझ रहे ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता है कि वह इस बीमारी के शिकार है। उन्होंने बताया कि सीओपीडी के प्रकोप को कम करने के लिए वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए। सर्वाजनिक वाहन का इस्तेमाल करें। चूल्हा का इस्तेमाल बंद होना चाहिए। कूड़े जलाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जानी चाहिए।

फैक्ट फाइल

-तीन करोड़ भारतीय सीओपीडी की चपेट में है

-60 लाख यूपी की आबादी को इस सांस की गंभीर बीमारी ने जद में ले रखा है

-5 लाख सीओपीडी पीड़ित हर साल तोड़ रहे हैं दम

सीओपीडी

-सीओपीडी की परेशानी 80 फीसदी स्मोकर में होती है, दूसरे कारणों से नांन स्मोकर में हो सकती है

-सीओपीडी के मरीजों में सांस फूलने के पीछे कोई ट्रिगर नहीं होता है

- सीओपीडी के 90 पीसदी मरीजों परेशानी 30 की उम्र के बाद होती है।

- सीओपीडी के मरीजों की परेशानी उम्र बढ़ने के साथ परेशानी बढ़ती जाती है

- कफ बनने की परेशानी बढ़ती जाती है

- फेफड़े और हवा पहुंचाने वाली नली परेशानी ठीक नहीं होती।

यह परेशानी तो लें सलाह

- सांस लेने में सीटी बजे

- सांस फूले

- सास लेने में परेशानी

-सीने में भारी पन

- कफ लगातार बने

-कफ के साथ खून

-थकान

- त्वचा के रंग में बदलाव।

यह भोजन रखेगा स्वस्थ्य

-भारी मात्रा में फल और सब्जियां खाएं

-उच्च मात्रा में फाइबर से युक्त भोजन लें

-उच्च प्रोटीन युक्त भोजन लें जिससे ज्यादा ऊर्जा मिले और संक्रमण से लड़ने में मदद मिले।

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