संशोधन बिल के प्रारूप में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं
Lucknow News - - पावर कॉरपोरेशन सभी घरों पर लगवा रहा स्मार्ट प्रीपेड मीटर, नए कनेक्शन भी स्मार्ट

विद्युत अधिनियम संशोधन बिल के प्रारूप में भी सभी उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता का जिक्र नहीं है। वहीं, मूल विद्युत अधिनियम में उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर में से कोई एक चुनने का विकल्प दिया गया है। ऐसे में अब सभी घरों में अनिवार्य तौर पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के पावर कॉरपोरेशन के आदेश पर सवाल खड़े हो गए हैं। कॉरपोरेशन ने तो यह भी आदेश दिए हैं कि नए कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ ही दिए जाएंगे। प्रदेश में सभी घरों में लगे पोस्ट मीटर को बदलकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) के तहत लगाए जा रहे हैं।
तकरीबन 27 हजार करोड़ रुपये की इस योजना पर पहले ही सवाल उठ रहे थे क्योंकि एक्ट में व्यवस्था है कि उपभोक्ताओं की मर्जी के बिना उनके घरों पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर नहीं लगाए जा सकते। ऐसे में योजना के विरोध पर बार-बार यह दलील दी जाती थी कि जब विद्युत अधिनियम में संशोधन किया जाएगा तो उसमें प्रीपेड मीटर को अनिवार्य कर दिया जाएगा। यह भी कहा जा रहा था कि मीटरों का विकल्प देने वाली धारा 47(5) में संशोधन होगा। अब केंद्र सरकार ने संशोधन बिल का प्रारूप जारी कर दिया है। इस प्रारूप में स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य किए जाने का कोई जिक्र नहीं है। इस धारा में संशोधन प्रस्तावित भी नहीं है। ऐसे में अब एक बार फिर कॉरपोरेशन के सभी घरों पर अनिवार्य तौर पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के आदेश पर सवाल खड़े हो गए हैं। बिना उपभोक्ताओं की मर्जी के 20 लाख मीटर प्रीपेड मोड में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन के आदेश को मनमाना और असंवैधानिक बताया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि संधोशन प्रारूप सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि यह उपभोक्ताओं के पास अब भी विकल्प है कि वे प्रीपेड मीटर चुनेंगे या पोस्टपेड। अब तक पूरे प्रदेश में 43,44,703 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 20,69,740 मीटरों को बिना उपभोक्ताओं की सहमति के प्रीपेड मोड में बदल दिया गया है। मीटर की सिक्योरिटी राशि भी बिना उनकी सहमति के प्रीपेड वॉलेट में ट्रांसफर कर दी गई है। यह बिजली कंपनियों की मनमानी है और बताती है कि उनकी व्यवस्था बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है। आयोग की चुप्पी पर सवाल उपभोक्ता परिषद ने कहा कि यह और भी चिंता की बात है कि जिन मीटरों प्रीपेड मोड में बदल दिया गया है, उनमें से 85% के बैलेंस नेगेटिव हैं। वहीं, नियमविरुद्ध पावर कॉरपोरेशन के मनमाने आदेश पर नियामक आयोग की चुप्पी पर भी सवाल हैं। आयोग तब चुप है जब उसे सभी दस्तावेज सौंपे जा चुके हैं।
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