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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेश लखनऊबड़े अफसरों की दखल से एलडीए में खड़ा हुआ विवाद, निजी आर्किटेक्ट फर्म को मिला था आवासीय योजना का काम

बड़े अफसरों की दखल से एलडीए में खड़ा हुआ विवाद, निजी आर्किटेक्ट फर्म को मिला था आवासीय योजना का काम

ऐसे ही नहीं एलडीए बदनाम हुआ है। प्राधिकरण के अफसरों ने कुछ काम ऐसे ही किए हैं जिसकी वजह से बदनामी और जांच के घेरे में हैं। ताजा मामला एक बड़े अफसर का सामने आया है। जिन्होंने आर्किटेक्ट के चयन के लिए ख

बड़े अफसरों की दखल से एलडीए में खड़ा हुआ विवाद, निजी आर्किटेक्ट फर्म को मिला था आवासीय योजना का काम
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,लखनऊFri, 24 Jun 2022 11:39 PM
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लखनऊ। प्रमुख संवाददाता

ऐसे ही नहीं एलडीए बदनाम हुआ है। प्राधिकरण के अफसरों ने कुछ काम ऐसे ही किए हैं जिसकी वजह से बदनामी और जांच के घेरे में हैं। ताजा मामला एक बड़े अफसर का सामने आया है। जिन्होंने आर्किटेक्ट के चयन के लिए खुद ही 25 में से 24 नंबर दे दिया। जबकि किसी अन्य अधिकारी व इंजीनियर ने संबंधित आर्किटेक्ट को इतने ज्यादा नंबर नहीं दिए थे।

एलडीए के मुख्य अभियंता इंदु शेखर सिंह को हटाए जाने के बाद कई दस्तावेज ऐसे सामने आए हैं जिसने प्राधिकरण के कामकाज और यहां होने वाली साजिशों से पर्दा उठा दिया है। हालांकि प्राधिकरण का कोई अफसर इसे मानने को तैयार नहीं है लेकिन दस्तावेज खुद इसकी गवाही दे रहे हैं।

हिन्दुस्तान को अक्टूबर 2021 के कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जो यहां के अफसरों के कामकाज पर सवाल उठाते हैं। एक बड़े अफसर ने खुद ही आर्किटेक्ट के चयन के लिए नंबर दिया था। जबकि इससे पहले इस स्तर के किसी अधिकारी ने आर्किटेक्ट के चयन के लिए नंबर नहीं दिया था। जिसकी वजह से उसे एक योजना में संबंधित आर्किटेक्ट को कंसलटेंट की जिम्मेदारी मिल गई। जिस आर्किटेक्ट को डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी संबंधित अफसर के ज्यादा नंबर देने की वजह से मिली उसे पूर्व में एलडीए की तरफ से कई नोटिस जारी की जा चुकी है। उसका कामकाज अच्छा नहीं रहा है।

इंदु शेखर सिंह ने संबंधित आर्किटेक्ट को 19 नंबर दिया था। एलडीए के मुख्य नगर नियोजक ने संबंधित आर्किटेक्ट को केवल 16 नंबर दिए थे। फाइनेंस कंट्रोलर ने भी 21 तथा सचिव ने भी संबंधित आर्किटेक्ट को 21 नंबर दिए थे। इन सबसे बड़े अफसर ने संबंधित आर्किटेक्ट को 25 में से 24 नंबर दे दिए। नंबर देने से पहले ही इस आर्किटेक्ट को काम दिए जाने का काफी दबाव था। फिर भी कुछ अधिकारी दबाव में नहीं आए और आर्किटेक्ट को ज्यादा नंबर नहीं दिए। पहली बार किसी बड़े अफसर ने आर्किटेक्ट के चयन में दखल दिया। एलडीए से हटाए गए इन्दुशेखर सिंह ने माना कि बड़े अफसर ने आर्किटेक्ट को 25 में 24 नंबर दिया था, जिसकी वजह से उसका चयन हो गया।

साजिश के तहत कार्रवाई

भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप में एलडीए से हटाए गए मुख्य अभियंता इन्दुशेखर सिंह का कहना है कि मेरे खिलाफ शिकायतों की जांच हुई लेकिन किसी में भी आरोप साबित नहीं हुआ। हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि उन्होंने किसी ठेकेदार को किसी अफसर के कहने से काम नहीं दिया। कुछ अफसर इसकी वजह से उनसे काफी नाराज चल रहे थे। ऐसे अफसरों ने ही उनके खिलाफ लिखा पढ़ी की और शिकायत कराई। साजिश के तहत कार्रवाई की गई।

पीएन सिंह के तबादले के बाद अफसरों और इंजीनियरों में शुरू हुई तनातनी

पूर्व उपाध्यक्ष पी एन सिंह के वर्ष 2019 में तबादले के बाद एलडीए में अफसरों और इंजीनियरों के बीच तनातनी का दौर शुरू हुआ था। पीएन सिंह के समय नियम के विरुद्ध कोई भी टेंडर नहीं पा सका। इसके बाद आए कई अधिकारियों और उपाध्यक्ष ने अपने चहेते ठेकेदारों को काम दिलाने के लिए इंजीनियरों पर दबाव बनाया। इंदु शेखर सिंह ने कई बड़े अफसरों को पहले ही ठेका देने से मना कर चुके थे। इसकी वजह से कई ठेकेदार भी नाराज थे। कुछ ठेकेदारों ने इंदु शेखर सिंह के खिलाफ शिकायत की तथा कुछ अफसरों ने दूसरे लोगों से शिकायत कराई।

एलडीए में अभी नहीं हुई किसी मुख्य अभियंता की तैनाती

एलडीए में अभी मुख्य अभियंता पद पर किसी की तैनाती नहीं की गई है और न ही किसी इंजीनियर को मुख्य अभियंता का चार्ज दिया गया है। प्राधिकरण में सबसे वरिष्ठ इंजीनियर अवधेश तिवारी हैं। जो अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात हैं। माना जा रहा था कि उन्हें चार्ज मिलेगा। प्राधिकरण उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी शुक्रवार को दफ्तर नहीं आए। इसकी वजह से आदेश नहीं जारी हुआ।

इंदु शेखर सिंह एलडीए से कार्यमुक्त

एलडीए से हटाए गए मुख्य अभियंता इंदु शेखर सिंह ने आवास बंधु में पदभार ग्रहण कर लिया। प्राधिकरण से उन्हें शुक्रवार को कार्यमुक्त कर दिया गया। इसी दिन उन्होंने आवास बंधु में जॉइनिंग दे दी।

अवस्थापना के 218 करोड़ के काम अटके

विकास कार्यों के 218 करोड़ की फाइल एलडीए में पड़ी हुई है। अवस्थापना की बैठक ही नहीं हो पा रही है। एलडीए उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी कई बार बैठक के लिए समय मांग चुके हैं लेकिन तिथि नहीं निर्धारित हो पाई। जिसकी वजह से करीब 2 वर्ष से अवस्थापना निधि के विकास के काम रूके हुए हैं। जबकि इसके मद में 80 करोड़ रुपए एलडीए में पड़ा हुआ है। अगर अवस्थापना के काम स्वीकृत हो गए होते तो शहर की तमाम सड़कें दुरुस्त हो जाती लेकिन एलडीए के इंजीनियरों ने जनता से जुड़े इन कामों की कराने की बजाय कमिश्नर के बंगले को संवारने के लिए एक करोड़ की फाइल तैयार कर ली। जिसको लेकर हंगामा मचा हुआ है। शासन में भी इस मामले को लेकर काफी हलचल है।

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