रिटायरमेंट से 23 माह पहले कर दिया अपर नगर आयुक्त का तबादला, नियमों पर उठे सवाल

Vijay Verma हिन्दुस्तान, लखनऊ
share

Lucknow News - लखनऊ के अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त का वाराणसी तबादला प्रशासनिक नियमों के खिलाफ माना जा रहा है। सेवानिवृत्ति में 23 माह शेष होने पर भी उनका स्थानांतरण हुआ है। इससे पहले भी इसी तरह के एक मामले में हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। प्रशासनिक गलियारों में इस निर्णय को लेकर चर्चा तेज है।

रिटायरमेंट से 23 माह पहले कर दिया अपर नगर आयुक्त का तबादला, नियमों पर उठे सवाल

लखनऊ, विजय वर्मा, प्रमुख संवाददाता। नगर निगम के अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त का लखनऊ से वाराणसी तबादला किए जाने के बाद प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। शासन के इस फैसले पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि उनका सेवानिवृत्ति काल करीब 23 माह शेष है। सामान्य प्रशासनिक नियमों के अनुसार जिन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति में दो वर्ष या उससे कम समय बचा हो, उनका तबादला विशेष परिस्थितियों को छोड़कर नहीं किया जाता है। जानकारी के अनुसार अरुण कुमार गुप्त को लखनऊ नगर निगम में कार्यरत हुए अभी लगभग दो वर्ष चार माह ही हुए हैं।

इसके बावजूद रविवार को जारी तबादला सूची में उनका नाम शामिल कर उन्हें वाराणसी स्थानांतरित कर दिया गया। इस निर्णय को लेकर निगम अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी चर्चा बनी हुई है।तबादला नीति में वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के निकट पहुंचे अधिकारी के तबादले को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।गौरतलब है कि इससे पहले पिछले वर्ष नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह का भी नियमों के विपरीत तबादला किए जाने का मामला सामने आया था। उस समय संबंधित अधिकारी ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए तबादला आदेश पर रोक लगा दी थी। ऐसे में अरुण कुमार गुप्त के तबादले को लेकर भी कानूनी और प्रशासनिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

Voice of UP

कृपया अपने अनुभव को रेट करें

Vijay Verma

लेखक के बारे में

Vijay Verma

विजय वर्मा पिछले करीब 24 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। उन्होंने लखनऊ से अपने करियर की शुरुआत की और लंबे समय तक हिंदुस्तान में स्टाफ रिपोर्टर से लेकर सीनियर रिपोर्टर और प्रमुख संवाददाता के रूप में काम किया। प्रशासन, राजनीति, शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं की रिपोर्टिंग में उनकी मजबूत पहचान है।


परिचय एवं अनुभव

विजय वर्मा उत्तर प्रदेश, विशेषकर राजधानी लखनऊ की पत्रकारिता में एक जाना-पहचाना नाम हैं। करीब ढाई दशक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर शहरी विकास से जुड़ी गंभीर और असरदार पत्रकारिता की है। हिंदुस्तान में रहते हुए उन्होंने न सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज़ बल्कि जनहित से जुड़ी गहन और फॉलो-अप आधारित रिपोर्टिंग को प्राथमिकता दी, जिससे कई मामलों में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई भी हुई।


करियर का सफर (हिंदुस्तान से शुरुआत)

विजय वर्मा ने पत्रकारिता की शुरुआत लखनऊ से हिंदुस्तान अखबार के साथ की। उन्होंने रियल एस्टेट, शहरी विकास, नागरिक सुविधाएं जैसे अहम क्षेत्रों में लगातार रिपोर्टिंग की और राजधानी लखनऊ के बदलते शहरी स्वरूप पर कई बड़ी स्टोरीज़ कीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

विजय वर्मा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बहुआयामी है। लखनऊ विश्वविद्यालय से बी.कॉम (स्नातक), समाजशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन, लोक प्रशासन में डिप्लोमा और इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इस अकादमिक आधार ने उन्हें सामाजिक मुद्दों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और नीतिगत फैसलों को गहराई से समझने में मदद की, जो उनकी रिपोर्टिंग में साफ झलकता है।


शहरी विकास और असरदार पत्रकारिता

राजधानी लखनऊ में तेजी से हो रहे शहरी विकास, बुनियादी ढांचे, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक लापरवाहियों पर विजय वर्मा ने कई प्रभावशाली खबरें कीं।


विशेषज्ञता

शहरी विकास, रियल एस्टेट और नागरिक सुविधाएं

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।