बिना आपकी सहमति के प्रीपेड हो गया मीटर? जमकर हो रहा विरोध, मामले को नियामक आयोग ले जाने की तैयारी
Lucknow News - उपभोक्ताओं की सहमति के बिना बिजली मीटर प्रीपेड किए जाने का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है। कॉस्ट डाटा बुक का उल्लंघन बताते हुए इसे नियामक आयोग ले जाने की तैयारी है। प्रदेश में अब तक 47.43 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बिना उनकी सहमति के प्रीपेड किए जा चुके हैं।

उपभोक्ताओं से सहमति के बिना बिजली मीटर प्रीपेड किए जाने का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है। विद्युत अधिनियम और कनेक्शन की दरें तय करने वाले आदेश यानी, कॉस्ट डाटा बुक का उल्लंघन बताते हुए इसे नियामक आयोग ले जाने की तैयारी है। प्रदेश में अब तक 47.43 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बिना उनकी सहमति के प्रीपेड किए जा चुके हैं।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा कि विद्युत अधिनियम की धारा 47(5) उपभोक्ताओं को अधिकार देती है कि वे प्रीपेड मीटर चुनें या पोस्टपेड। उन्हें कोई बाध्य नहीं कर सकता है। कनेक्शन के नए आदेश में भी साफ है कि उपभोक्ताओं के पास पोस्टपेड मीटर चुनने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेशों में उपभोक्ताओं का यह अधिकार संरक्षित रखा है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस मामले को नियामक आयोग ले जाएंगे और उपभोक्ता अधिकारों पर सख्त आदेश जारी करने की मांग करेंगे।
प्रदेश में लगभग 31,79,011 उपभोक्ताओं के मीटर प्रीपेड किए जाने के बाद बैलेंस नेगेटिव हो गया है। इन पर कुल बकाया राशि 1097 करोड़ रुपये है। उपभोक्ता असमंजस में हैं कि वे पोस्टपेड व्यवस्था में थे और अचानक बिना किसी सूचना या सहमति के उन्हें प्रीपेड मोड में डाल दिया गया। उनके खातों में रकम भी उनकी समझ में नहीं आ रही।

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