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उपभोक्ता अदालतों में नियुक्तियां न किए जाने से न्यायिक कार्य बाधित

- उपभोक्ता रोजाना चक्कर काटने को मजबूर, मिल रहीं सिर्फ तारीख पर तारीख- यूपी कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन बार एसोसिएशन ने राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने की मांग कीलखनऊ। निज संवाददाताराज्य उपभोक्ता आयोग व प्रदेश के 79 जिला फोरमों में अध्यक्ष व सदस्यों के पद काफी समय से रिक्त हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य सरकार इन पदों पर नियुक्तियां नहीं कर रही है। जिससे बीते कई महीनों से न्यायिक कार्य पूरी तरह से बाधित चल रहा है। उपभोक्ताओं को सिर्फ तारीख पर तारीख ही मिल रही हैं। जिससे उपभोक्ताओं में काफी रोष है। यूपी कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन बार एसोसिएशन ने राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर तत्काल नियुक्तियां करने की मांग की। ताकि उपभोक्ता अदालतों का कार्य सुचारू रूप से चल सके।एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रज कुमार उपाध्याय ने बुधवार को राज्य उपभोक्ता आयोग में प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य आयोग में वर्तमान समय में पांच पीठ गठित हैं। जिसके लिए 10 सदस्यों के पद सृजित हैं। 10 में आठ सदस्यों के पद रिक्त पड़े हैं। वहीं प्रदेश के 79 जिला फोरमों में अध्यक्ष, सामान्य सदस्य व महिला सदस्य 237 पद में से 125 से अधिक पद खाली हैं। कोरम न पूरा होने से राज्य उपभोक्ता आयोग में 30 हजार जबकि सभी जिला फोरमों में दो लाख से अधिक वाद लंबित पड़े हैं। इनमें ज्यादातर बीमा, मेडिकल, बिजली व किसानों से संबंधित वाद हैं।संगठन महासचिव आलोक रंजन का कहना है कि उपभोक्ता अदालतों में हर वाद का निस्तारण 90 से 150 दिनों में किए जाने का प्रावधान है। हकीकत यह है कि वर्षों से मामले लंबित चल रहे हैं। आठ से नौ महीने आगे की तारीखें दी जा रही है।

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