राहुल गांधी की चिट्ठी आई है..UP में चुनावी मोड में कांग्रेस! 'मनरेगा' मजदूरों तक पहुंचाया जाएगा राहुल का संदेश
Lucknow News - - 100 दिनों में 30 से ज्यादा संविधान संवाद रैली करेगी कांग्रेस - पालिटिकल अफेयस

इस साल प्रस्तावित पंचायत और अगले साल प्रस्तावित विधान सभा चुनावों के लिए कांग्रेस अब जनता के बीच पहुंचने की तैयारी में है। इसके लिए मनरेगा, एसआईआर और संविधान संवाद सभाओं का सहारा लिया जाएगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की चिट्ठी हर ग्राम प्रधान, पूर्व प्रधान, रोजगार सेवकों और मनरेगा मदूरों तक पहुंचाई जाएगी। केंद्र सरकार ने मनरेगा को वीबी जी-राम-जी योजना से बदल दिया है। इसके विरोध में कांग्रेस ने आंदोलन की बड़ी योजना तैयार की है। इसके अलावा पार्टी ने अगले 100 दिनों में 30 से ज्यादा संविधान संवाद रैलियां करेगी।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में शुक्रवार को यूपी कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की अगुआई में पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी व मनरेगा और एसआईआर को-ऑर्डनेटरों की बैठकें हुईं। सभी बैठकों में पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा हुई और तय किया गया है कि बड़े पैमाने पर रैलियां, सभाएं, प्रभात फेरियां और चौपालें लगाई जाएंगी। तय किया गया है कि हर ग्राम पंचायत में प्रधानों, पूर्व प्रधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा मजदूरों के साथ चौपाल होगी। इसमें उन्हें बताया जाएगा कि मनरेगा बदलने से उन्हें क्या नुकसान होने जा रहा है। दीवारों पर पेंटिंग की जाएगी और 26 जनवरी को गांवों में मनरेगा बचाने के लिए प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। योजना है कि सभी मनरेगा मजदूरों से मनरेगा बचाने के लिए राष्ट्रपति के नाम चिट्ठी लिखवाई जाएगी। कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी का एक वीडियो रिकॉर्ड किया गया है, जिसे सभी तक पहुंचाया जाएगा।
अविनाश पांडे ने कहा कि यह चुनावी वर्ष है। सभी लोग चुनाव की तैयारियों में जुटें। पंचायत, एमएलसी और विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी की चुनौतियों का एक विस्तृत रोडमैप तैयार करना है और उसे जमीन पर उतारना है। अजय राय ने कहा कि आने वाले 100 दिनों होने वाली 30 रैलियों में हम जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाएंगे। आराधना मिश्रा ने तय हुए कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा रखी। वॉर रूम इंचार्ज संजय दीक्षित ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही मनरेगा को खत्म करने की कोशिश हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक में विधान सभा चुनावों के लिए गठबंधन को लेकर चर्चा हुई, जिसमें पूरी पार्टी दो हिस्सों में बंटी दिखाई दी। ज्यादातर नेता यूपी में गठबंधन के बिना चुनाव मैदान में उतरने के हिमायती हैं जबकि गठबंधन के पक्षधरों में सपा या बसपा को लेकर अलग-अलग राय है। कुछ सपा के साथ गठबंधन बरकरार रखना चाहते हैं जबकि कुछ नेताओं की मंशा बसपा के साथ विधान सभा चुनाव में जाने की है।
बैठक में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, बृजलाल खाबरी, राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर, राजेश तिवारी, तौकीर आलम, प्रदीप नरवाल, सुप्रिया श्रीनेत, कांग्रेस के संयुक्त सचिव मनोज त्यागी, राज्यसभा में उपनेता प्रतिपक्ष प्रमोद तिवारी, सांसद केएल शर्मा, उज्जवल रमण सिंह, इमरान मसूद, तनुज पुनिया, पूर्व सांसद पीएल पुनिया, कुंवर दानिश अली, एपी गौतम, रवि वर्मा, पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, नकुल दुबे, पूर्व विधायक भगवती प्रसाद चौधरी, पूर्व एमएलसी दीपक सिंह, निवर्तमान प्रदेश महासचिव (संगठन) अनिल यादव, पिछड़ा वर्ग विभाग चेयरमैन मनोज यादव, संजय दीक्षित आदि उपस्थित रहे।
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