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भाजपा के समीकरण काटने में जुटी कांग्रेस

bjp  equation  elections

1 / 4भाजपा के समीकरण काटने में जुटी कांग्रेस

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पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस भले ही पूर्वांचल में तीसरी व चौथे नंबर पर रही, लेकिन इस चुनाव में सभी सीटों पर टक्कर देने की रणनीति   पर चल रही है। उसने सत्तारूढ़ भाजपा को पस्त करने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है। जातिगत समीकरणों पर पूर्वांचल जीतने का संकल्प लेकर उतरी भाजपा को वह उसी के दांव से पस्त करने में जुटी है। 
कांग्रेस ने ज्यादातर सीटों पर भाजपा के खिलाफ उसके उलट दूसरी जाति वालों को प्रत्याशी बनाया। जिन सीटों पर भाजपा ने पिछड़ा उम्मीदवार उतारा, कांग्रेस वहां अगड़ों पर दांव आजमा रही है। वहीं, भाजपा के अगड़े प्रत्याशियों के खिलाफ पिछड़ों के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने में जुटी है। पूर्वांचल की तीन वीआईपी सीटें चंदौली, मिर्जापुर और गाजीपुर में दोनों दलों ने प्रत्याशियों के जरिए जातिगत वाटों को अपनी-अपनी तरह से साधने का प्रयास किया है। 

मिर्जापुर
कांग्रेस ने कमलापति त्रिपाठी के पौत्र ललितेशपति त्रिपाठी मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में ललितेश पति तीसरे स्थान पर रहे थे। भाजपा-अद गठबंधन से अनुप्रिया पटेल चुनाव जीतीं और केंद्रीय मंत्री भी बनीं। एक बार फिर दोनों आमने-सामने हैं। यहां सपा से राजेंद्र एस बिंद भी मैदान में हैं। जातिगत समीकरण देखें तो यहां लगभग सवर्ण वोटर 4.25 लाख हैं। वहीं, पिछड़ा 9.40 लाख। इसमें सबसे ज्यादा तीन लाख के करीब कुर्मी और कोइरी डेढ़ लाख। वहीं, दलित 3.25 लाख और मुसलमान करीब एक लाख के पार हैं। भाजपा यहां अनुप्रिया के जरिए सवर्णों व पिछड़ी जातियों के वोटरों के जरिए सत्ता तक पहुंचने में जुटी हैं। कांग्रेस अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल के साथ मिलकर यहां के कुर्मी, सवर्णों, मुसलमानों को अपने पाले में करने में जुट गयी है। 

गाजीपुर
केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा एक बार फिर मैदान में हैं। यहां कांग्रेस ने अजित प्रताप कुशवाहा को प्रत्याशी उतारा है। अजीत प्रताप सिंह पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की पार्टी के नेता हैं। उन्हें कांग्रेस अपने टिकट पर चुनाव लड़ा रही है। कांग्रेस ने कुशवाहा वोटरों को साधने के लिए बड़ा दांव खेला है। गाजीपुर सीट पर कुशवाहा वोटर 1.50 लाख से 1.75 लाख के बीच हैं।  सपा ने 2014 में यादव-मुस्लिम समीकरण के साथ कुशवाहा वोटरों की बदौलत बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या को उतारा था। तब शिवकन्या 274477 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रही थीं। इस बार कुशवाहा, सवर्ण व मुस्लिम वोटरों को ज्यादा से ज्यादा साधने का प्रयास होगा। यहां सवर्ण- 5.50 लाख, यादव-3.82 लाख, दलित- 1.72 लाख, अल्पसंख्यक-1.15 लाख और पिछड़ावर्ग- 5.30 लाख वोटर हैं। जिसमें वैश्य, कुर्मी, निषाद, चौहान, मौर्य, पाल, राजभर कुम्हार, कोहार, बिंद शामिल हैं। 

वाराणसी
वाराणसी सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद देश भर की निगाहें इस सीट से उतरने वाले कांग्रेस प्रत्याशी पर टिकी हैं। यहां पार्टी की ओर से मांगे गए आवेदनों में दो ने उम्मीदवारी जताई है। इसमें एक पूर्व विधायक हैं तो दूसरे सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं। हालांकि वाराणसी से प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की चर्चा पिछले कई दिनों से जोरों पर हैं लेकिन स्थानीय पदाधिकारी का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। यह जरूर है कि उनकी भी इच्छा है कि प्रियंका गांधी बनारस से चुनाव लड़ें। यदि ऐसा हुआ तो मुकाबला दिलचस्प होगा।

चंदौली
भाजपा से महेंद्र नाथ पांडेय के खिलाफ कांग्रेस ने सहयोगी दल जन अधिकारी पार्टी की शिवकन्या कुशवाहा को उतारा है। भाजपा के यहां अगड़ी जाति की राजनीति के टक्कर में पिछड़ा कार्ड खेला है। यह सीट सपा के खाते में हैं। सपा ने कोई पत्ता नहीं खोला है लेकिन कांग्रेस शिवकन्या के जरिए दलित वोटों को साधने का भी प्रयास किया है।  यहां करीब सवर्ण-2.50 लाख, दलित - 3 लाख, अल्पसंख्यक- 1.50 लाख, यादव- 1.50 लाख और पिछड़ावर्ग-4.30 लाख हैं। इसमें सबसे ज्यादा राजभर, कुर्मी, कोईरी आदि प्रमुख जातियां हैं। 

सलेमपुर
यहां भाजपा ने रविंद्र कुशवाहा को उतारा है। रवीन्द्र कुशवाहा पिछली बार सांसद चुने गए थे। कांग्रेस ने वाराणसी से पूर्व सांसद राजेश मिश्रा को टिकट दे देकर अगड़ों की जोड़ने की कोशिश की है। माना जाता रहा है कि इस सीट पर कुशवाहा बिरादरी वाले प्रत्याशियों को ही सफलता मिली है। इसलिए कांग्रेस ने भी ताकत झोंक दी है। ब्राह्मण1.23 लाख, क्षत्रिय 1.49 लाख, यादव 2.96 लाख, मुस्लिम1.14 लाख, कुशवाहा1.98 लाख, राजभर1.66 लाख तथा ढाई लाख दलित वोटर हैं।  

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