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3 अप्रैल, 2020|3:16|IST

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दलितों के संघर्ष व उनके आन्दोलनों में सक्रिय नहीं रहे भाजपा के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार-दिग्विजय सिंह

-कांग्रेस सहयोगी दलों के साथ बैठक कर राष्ट्रपति पद के चुनाव पर रणनीति तय करेगी-समूह में योग करवाना उचित नहीं, यह मूल मुद्दों से ध्यान हटाने का एक ईवेंटविशेष संवाददाता - राज्य मुख्यालयकांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा है कि राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा द्वारा उम्मीदवार बनाए गए रामनाथ कोविंद कभी दलितों के संघर्ष या आन्दोलनों में सक्रिय नहीं रहे। हमें इस नाम पर कोई एतराज नहीं है मगर भाजपा नेतृत्व अपने अन्य सहयोगी दलों से तो बात करता। अब कांग्रेस पार्टी अन्य विपक्षी पार्टियों के साथ बैठक कर राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए जल्द ही रणनीति तय करेगी।श्री सिंह ने यह बातें मंगलवार को लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में कहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा दलितों का उत्पीड़न करने वाली पार्टी है। गोरक्षा के नाम पर हाल ही में दलितों पर अत्याचार की हुई घटनाएं इसकी मिसाल हैं।समूह में योग करना उचित नहींअन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि समूह में योग करवाना उचित नहीं है। तर्क दिया कि हर मनुष्य की एक विशिष्ट शारीरिक बनावट होती है इसलिए हर व्यक्ति को एक ही तरह के योगासन करवाना नुकसानदायक भी हो सकता है। उन्होंने इस कार्यक्रम को मूल मुद्दों से ध्यान बंटाने के लिए एक ईवेंट करार दिया। उन्होंने कहा कि लाल कृष्ण आडवाणी ठीक ही कहते थे कि नरेन्द्र मोदी बहुत अच्छे ईवेंट मैनेजर हैं।उन्होंने कहा कि किसानों के असंतोष का कारण उपज का वाजिब दाम न मिलना है। दो तीन वर्षों में किसानों की लागत के हिसाब से उनकी उपज के मिलने वाले दामों में गिरावट आई है। खासतौर पर नोटबंदी के बाद। मोदी सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पिछले साल अच्छा मानसून था, गेहूं की अच्छी फसल हुई। मगर केन्द्र ने गेहूं का आयात शुल्क दस प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया। दलहन का आयात शुल्क घटा देने से भी देश में विदेशों से गेहूं और दलहन की बड़ी मात्रा में आवक हुई और किसानों को घरेलु पैदावार के अच्छे दाम नहीं मिल पाए। जीएसटी को दोषपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे अव्यवस्था फैलेगी। यह व्यापारियों को अधिकारियों के शिकंजे में फंसाने की एक कुटिल योजना है।