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बिजली उपकेंद्रों की खाली जमीनों पर खड़ें होंगे कामर्शियल कांप्लेक्स

- प्रदेश में 603 बड़े उपकेंद्र हैं इनमें से करीब एक तिहाई शहरों में होने

बिजली उपकेंद्रों की खाली जमीनों पर खड़ें होंगे कामर्शियल कांप्लेक्स
हिन्दुस्तान टीम,लखनऊSun, 02 Apr 2023 06:50 PM
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- प्रदेश में 603 बड़े उपकेंद्र हैं इनमें से करीब एक तिहाई शहरों में होने का अनुमान है

पारेषण के उपकेंद्रों की संख्या

400 केवी---30

220 केवी---131

132 केवी---442

वितरण के उपकेंद्रों की संख्या

66 केवी----4

33 केवी---4480

लखनऊ - हेमंत श्रीवास्तव

शहरी क्षेत्रों में स्थित विद्युत विभाग के पारेषण से जुड़े उपकेंद्र जहां पर मौजूदा समय में अनुपयोगी जमीनें हैं, वहां पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होंगी। इन जमीनों पर कामर्शिलय कांप्लेक्स, बैंक, डाकघर और अन्य व्यवसायिक भवनों का निर्माण होगा। यह योजना भारत सरकार की योजना रेलवे और अन्य विभागों की खाली पड़ी जमीनों पर बड़े कामर्शियल कांप्लेक्स बनवाने जैसी हो होगी।

उ.प्र. पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने अभी सिर्फ 400, 220 और 132 केवी की उन शहरी उपकेंद्रों का ब्यौरा मांगा है जो प्राइम लोकेशन पर हैं। इस सूचना के साथ ही इन उपकेंद्रों के पास उपलब्ध अनुपयोगी भूमि का ब्यौरा प्रबंधन ने तलब किया है। प्रबंधन ने अपने आदेश में सिर्फ इतना ही लिखा है कि इन अनुपयोगी जमीनों को कामर्शिलय कांप्लेक्स, बैंक, डाकघर आदि भवनों के निर्माण में लिया जा सकता है। मुख्य अभियंताओं से यह ब्यौरा तत्काल देने को कहा गया है।

अनुपयोगी जमीनों को लीज पर भी दे सकता है प्रबंधन

अभी यह नहीं बताया जा रहा है कि अनुपयोगी भूमि निजी संस्थाओं को लीज पर दी जाएंगी, बेची जाएंगी या फिर बिजली कंपनियां खुद इस तरह के निर्माण कराएंगी। जानकार बताते हैं कि करीब एक लाख करोड़ के घाटे से गुजर रही बिजली कंपनियां खुद इस तरह का कोई निर्माण नहीं करने वाली हैं। विभाग में यह चर्चा है कि यदि जमीनें बेच दी गईं अथवा लंबी अवधि के लिए लीज पर दे दी गईं तो आबादी बढ़ने के साथ उपकेंद्रों के एक्सटेंशन में दिक्कतें आ सकती हैं। प्रबंधन को भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा।

प्रदेश में 132 से 400 केवी क्षमता की 603 उपकेंद्र हैं

प्रदेश में इस समय ट्रांसमिशन उपकेंद्रों में 400 केवी क्षमता की 30, 220 केवी क्षमता की 131 तथा 132 केवी क्षमता की 442 उपकेंद्र मौजूद हैं। कुल 603 उपकेंद्रों में करीब दो सौ उपकेंद्र ऐसे होंगे जो शहरी क्षेत्रों में अथवा शहर से लगे मुख्य मार्ग पर स्थित हैं। इनके अलावा भी पावर कारपोरेशन के पास शहरों में तमाम ऐसी जमीनें हैं जहां पर वर्तमान में कोई काम नहीं होता है।

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