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विधानसभा में बसपा नेता पर टिप्पणी से तीखी नोकझोंक

विधानसभा में भाजपा के सदस्य दल बहादुर कोरी की बसपा नेता के प्रति की गई टिप्पणी के कारण गुरुवार को खासा हंगामा हो गया। इस कारण बसपा दल के नेता लालजी वर्मा व सत्ता पक्ष के स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। इस कारण सदन की बैठक करीब 55 मिनट स्थगित रही। बाद बसपा नेताओं के दबाव बनाने पर दल बहादुर कोरी ने अपनी कही बात को वापस लेने को कहा।

असल में मामला तब और गर्माया जब श्रम व रोजगार मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कोरी की तरफदारी करते हुए कहा कि उन्होंने जो कहा है वह सच ही है। बसपा सदस्यों की आपत्तियों पर श्रम एवं रोजगार मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य कोरी के बचाव में बोलने लगे। उन्होंने कहा कि कोरी उस पार्टी में रहते हुए जिन स्थितियों से गुजरे हैं, उन्होंने केवल उसका इजहार किया है। कोरी बसपा में भुक्तभोगी रहे हैं। इसके बाद मौर्य ने आवेश में आते हुए कहा कि जब बसपा में अम्बेडकर व कांशीराम के मिशन को बेचा जाने लगा तो उन्होंने बसपा छोड़ दी।

बसपा के लालजी वर्मा व स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक दूसरे पर खासे गंभीर आरोप लगाए। श्री वर्मा ने तीखा प्रतिवाद करते हुए कहा कि कोई नेता भले ही दल छोड़ दे लेकिन उसे उसके नेता का सम्मान जरूर करना चाहिए। बसपा की इस बात का समर्थन नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने भी किया। बसपा के वर्मा व सुखदेव राजभर ने मांग की कि कोरी माफी मांगें क्योंकि उन्होंने सदन में बसपा नेता का नाम लिया है। इस पर मौर्य ने कहा कि कोई नाम नहीं लिया गया है और आपत्तिजनक हिस्से को सदन की कार्यवाही से हटाया जा सकता है। नोकझोंक थमती न देखकर विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने सदन की कार्यवाही 55 मिनट तक स्थगित रखी।

सदन दोबारा बैठा तो कोरी ने कहा कि भाजपा की वजह से ही बसपा राज्य में तीन बार सरकार बना चुकी है। अगर उनके कहे किसी शब्द से कोई आहत हुआ हो तो वह अपने शब्द वापस लेते हैं। बाद में विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने व्यवस्था दी कि सभी ऐसे वक्तव्यों, जिसमें क्लेश पहुंचाने वाली बात कही गई, कार्यवाही का हिस्सा नहीं होगा। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने पूरे मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सदन में आदर और सम्मान की परंपरा रही है।

बाद में दलबहादुर कोरी ने कहा कि हम लोग सम्मान करने वाले लोग हैं। भाजपा के लालजी टंडन ने राखी बांधकर बहन जी की उपाधि दी थी। स्व. ब्रह्मदत्त द्विवेदी व उन्होंने बसपा नेता को हमले से बचाया। भाजपा ने तीन बार समर्थन देकर बसपा की सरकार बनवाई। फिर भी अगर मेरी कही किसी बात से कोई आहत हुआ है तो उसे वापस लेता हूं।

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