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विनाशकारी साबित होगा जलवायु परिवर्तन

पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. भरतराज सिंह ने भविष्य में होने वाली तबाही से किया आगाहतूफानी बारिश, धूलभरे तूफान, बर्फवारी व जलप्लावन जैसी घटनाओं में हो सकती है वृद्धिलखनऊ। प्रमुख संवाददातापिछले चार-पांच वर्षों में जिस तेजी से जलवायु में परिवर्तन हुआ है उससे आने वाला समय बहुत ही विनाशकारी साबित कर सकता है। इसका असर पूरे विश्व विशेषकर समुद्र के किनारे बसे देशों पर पड़ सकता है। कहीं तूफानी बारिश तो कहीं धूल भरे तूफान से लोगों को जूझना पड़ सकता है। बर्फवारी व जलप्लावन जैसी दैवी आपदा की संभवना से इनकार नहीं किया जा सकता।यह आशंका वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिक व वैदिक विज्ञान केन्द्र के संस्थापक प्रो. भरतराज सिंह ने व्यक्त की है। उनका कहना है कि गत दिनों केदारनाथ में चट्टान टूटने की घटना हो या पिछले वर्ष ओडिशा, चेन्नई, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान व मध्य प्रदेश में भरी बारिश से जनजीवन का प्रभावित होना। ये घटनाएं भविष्य के लिए संकेत हैं। आने वाले दिनों में इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। जलवायु परिवर्तन का असर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अमेरिका, लन्दन, जर्मनी, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, चीन, जापान आदि पर भी पड़ेगा। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2016 में दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान, बर्फिस्तान बन गया। सहारा मरुस्थल में बर्फबारी देखकर मौसम विज्ञानियों के भी पसीने छूट गए। उस विशाल रेगिस्तान में चारों तरफ बर्फ जम गई। सऊदी अरब जो रेगिस्तान में बसा है। वहां बूंद-बूंद पानी के लिए मीलों सफर करना पड़ता है। वहां भी ऐसी बर्फबारी हुई कि पहाड़ सफेद हो गए। रूस का सबसे ठंडा इलाका साइबेरिया, जहां साल भर बर्फ रहती है। इस बार ऐसी बर्फबारी हुई कि 83 सालों का रिकर्ड टूट गया। पारा माइनस 62 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। उन्होंने बताया कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लेशियर का तेजी से पिघलना है। धरती पर हवा और पानी की तरह बर्फ भी बेहिसाब है। उत्तरी ध्रुव पर 1 लाख 10 हजार वर्ग किलोमीटर और दक्षिणी ध्रुव पर 1 लाख 37 हजार वर्ग किलोमीटर बर्फ थी। उत्तरी ध्रुव पर आधे से ज्यादा बर्फ समाप्त हो चुकी है। नासा ने धरती से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष से तस्वीर ली हैं। उसमें आर्कटिक जोन में भयानक हलचल दिख रही है। नर्थ पोल की बर्फ पिघलकर महासागरों में मिल रही है। ऐसे में समुद्र के किनारे बसे देश महासागरों में समा जाएंगे। जरूरी उपाय कम कर सकती है तबाहीप्रो. सिंह ने बाताया कि इस प्रकार की घटनाओं की जानकारी उन्होंने वर्ष 2012 से 2015 के बीच प्रकाशित उनकी किताबों में दी है। सभी को आवश्यक कदम उठाने के लिए आगाह भी किया गया है। धरती पर मचने वाली तबाही से बचने के लिए कुछ जरूरी उपाय करने होंगे। इसमें अधिकतम पेड़ लगाने, डीजल व पेट्रोल चालित वाहनों का न्यूनतम इस्तेमाल, कोयले से चलने वाले थर्मल पवर स्टेशन के स्थान पर सौर उर्जा व पवन उर्जा से बिजली बनाना, एलईडी बल्ब व ट्यूब लाइट का अधिकतम इस्तेमाल, ठंड में गीजर का न्यूनतम इस्तेमाल, कचरे से बिजली बनाने, प्लास्टिक की जगह कपड़े के थैले का उपयोग, पूल कार अथवा पब्लिक वाहन का इस्तेमाल, एसी का तापमान 25-26 डिग्री रखने, पुरानी वस्तुओं का दोबारा उपयोग करने जैसे उपाय तबाही को कम कर सकते हैं।

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  • Web Title:Climate change will prove destructive