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आईओआरए देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए एक परिषद गठन करने का सुझाव

वैज्ञानिकों तथा नीति-निर्धारकों के बीच औषधीय जड़ी बूटियों और उनसे बने उत्पादों का व्यापार बढ़ाने पर हुई चर्चा लखनऊ। सीमैप में चल रहे छह दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के चौथे दिन गुरुवार को वैज्ञानिकों और नीति-निर्धारकों की ओर से आईओआरए(इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन) देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए एक परिषद गठन करने का सुझाव दिया गया। जिससे इन देशों के बीच में कच्चे औषधीय जड़ी बूटियों और उनसे बने उत्पादों का व्यापार करने में मदद प्रदान की जा सके। साथ ही परिषद विभिन्न भागीदारों के बीच संवाद स्थापित करने में भी सहायक हो सकेगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान औषधीय एवं सगंध पौधा महासंघ के अध्यक्ष डॉ. जनकराज रावल ने सबसे अधिक आयात व निर्यात होने वाले औषधीय पौधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने आईओआरए देशों के प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे अपने देशों में हर्बल उत्पादों के बढ़ावे के लिए किसानों, उद्योगों तथा वैज्ञानिकों के साझा प्रयासों को बढ़ावा दें।अन्य वक्ता रॉयल बोटैनिक गार्डन क्यू, इंग्लैंड के डॉ. बॉब ऐल्किन ने औषधीय पौधों की पहचान करने की विभिन्न तकनीकियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न देशों के भिन्न-भिन्न मानकों के कारण पौधों को पहचानने और उनका विपणन करने में परेशानी आती है।प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक हर्बल उत्पाद बनाने वाले कंपनी के विभागाध्यक्ष डॉ. जेएलएन शास्त्री ने बताया कि अभी भी कई देशों में औषधीय पौधों का व्यापार अनियमित और कम गुणवत्ता-युक्त है और इसको ठीक करने के लिए रासायनिक गुणवत्ता तथा डीएनए फिंगरप्रिंटिंग को बढावा देना होगा। प्रतिभागियों को सीमैप की विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण करवाया गया। इस भ्रमण का संचालन डॉ. अनिर्बन पाल व डॉ. करुणा शंकर ने किया।

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