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कागजों पर फल का स्वाद चख रहे हैं परिषदीय स्कूलों के बच्चे

शासन की कल्याणकारी योजनाओं को विभागीय अफसर फ्लाप करने में जुटे हुए हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षारत नौनिहालों के लिए फल वितरण योजना का शुभारंभ किया गया था। सप्ताह के प्रत्येक सोमवार को फल वितरण किया जाना था, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते केवल कागजों पर ही बच्चे फलों का स्वाद चख रहे हैं।
फल वितरण के नाम पर विभागीय कर्मचारी कागजी कोरम पूरा कर रहे हैं। इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है वही लोग शासन की महत्वपूर्ण योजना को पलीता लगा रहे हैं। प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे नौनिहालों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता दिखाते हुए प्रत्येक सोमवार को बच्चों को मौसमी फल वितरित किए जाने का आदेश दिया था। इसमें चार रुपए प्रति छात्र के हिसाब से धनराशि भी मध्याह्न भोजन समिति के खाते में भेजती है। खाते के संचालन की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक तथा ग्राम प्रधान को सौंपी गई है। शिक्षा क्षेत्र बसखारी में 118 प्राथमिक विद्यालय व 42 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, जिसमें 70 फीसदी बच्चे नियमित विद्यालय में उपस्थित रहते हैं। अधिकांश विद्यालयों में सिर्फ कागजों पर फल वितरण हो रहा है। बच्चों को कब से फल नसीब नहीं हुआ है, इसकी हकीकत का खुलासा तो तब होगा जब कोई उच्चाधिकारी सीधे बच्चों से रूबरू होगा। ग्रामीणों ने मौखिक रूप से आलाधिकारियों से फल वितरण न होने की शिकायत भी की है। लेकिन उनकी आवाज अनसुना कर दिया जाता है।
अकबेलपुर में अक्तूबर से नहीं बंटा फल
शिक्षा क्षेत्र बसखारी के प्राथमिक विद्यालय अकबेलपुर में केवल अक्तूबर 2017 तक ही फल वितरण हो सका है। इसके बाद से अभी तक बच्चों में फल का वितरण नहीं हो पाया है। इस संबंध में प्रधानाध्यापक मुख्तार अहमद ने बताया कि शासन ने 4280 रुपए बजट निर्गत किया था, जिसमें से अक्तूबर माह तक 8490 रुपए का फल वितरण किया जा चुका है।

 

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  • Web Title:Children of the council schools are tasting fruit on paper