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बारिश से पहले शिवरी प्लांट को दुरुस्त करना चुनौती

आंधी में तहस-नहस हो चुका है प्लांट लखनऊ। प्रमुख संवाददाता आंधी से तबाह हुए शिवरी प्लांट को दुरुस्त होने में माहभर से ज्यादा समय लगना तय है। मानसून दस्तक देने वाला है। ऐसे में कूड़ा निस्तारण का पूरा काम ठप होना तय है। ईको ग्रीन के अधिकारी परेशान हैं। प्लांट में लगे उपकरण व कम्पोस्ट बचाना नई चुनौती बनकर सामने आ गई है। नई कम्पनी ईको ग्रीन ने कूड़ा कलेक्शन के बाद कूड़ा निस्तारण प्लांट संचालित करने का काम अभी शुरू ही किया था। शिवरी में जमा हुए लगभग 70 प्रतिशत कूड़े का ढेर समाप्त हो पाया था। दो-चार में पूरा कूड़ा समाप्त होने की उम्मीद थी। कूड़े से बिजली बनाने का काम भी शुरू हो गया था। बिजली बनाने के लिए एक गैसीफायर लगाया गया है। कूड़े से बनाए जा रहे आरडीएफ (रिफ्यूज्ड ड्राइड फ्यूल) का इस्तेमाल इसी में किया जा रहा था और 125 किलोवाट का जनरेटर से 60-70 किलोवाट बिजली बनाई जा रही थी। इसके अलावा दोबारा जलाने के उपयोग में लाने के लिए काम्पैक्ड ब्रिकेट्स व जैविक कचरे से कम्पोस्ट भी बनाने का काम शुरू हो गया था। आंधी ने सभी कामों पर विराम लगा दिया है। प्लांट बनाने का काम कार्यदायी संस्था सीएण्डडीएस की देखरेख में पूर्व की कम्पनी ज्योति इनवायरोटेक ने किया था। निर्माण कार्य में गुणवत्ता से जमकर खिलवाड़ हुआ। टिनशेड, दरवाजे, खिड़कियां तो तहस-नहस हुई ही, साथ में चहारदीवारी भी ढह गई। नई कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि यदि मानक के अनुसार गुणवत्तापरक निर्माण हुआ होता तो ऐसी स्थिति नहीं आती। सबसे बड़ी चुनौती बारिश से पहले नया टिनशेड लगाने व चहारदीवारी बनाने की है। अन्यथा अब तक हुए काम पर पानी फिर जाएगा। ---------------- गुणवत्ता से समझौता व नुकासान की भरपाई के लिए सीएण्डडीएस को पत्र लिखा जाएगा। बारिश से पहले नया स्ट्रकचर तैयार होने की पूरी कोशिश होगी। नया शेड व चहारदीवारी बनाने में जो भी खर्च होगा उसका भुगातन सीएण्डडीएस से कराया जाएगा। उदयराज सिंह, नगर आयुक्त

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  • Web Title:Challenge to repair shivri plant before rain