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कैबिनेट- सीमेण्ट निगम कार्मिकों को 18 साल बाद मिला इंसाफ

विशेष संवाददाता--राज्य मुख्यालयकैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राज्य सीमेण्ट निगम लिमिटेड के 723 कर्मियों (श्रमिक आदि) की छंटनी की तारीख से उनके राजकीय सेवा में समायोजन, पेंशन और चालीस प्रतिशत बैक वेजेज आदि का लाभ दिए जाने की स्वीकृति दे दी है। दरअसल इस मामले में प्रदेश सरकार के खिलाफ कई अवमानना वाद चल रहे थे। इन अवमानना वादों को निस्तारित करते हुए प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है। 18 अप्रैल 1972 के एक शासनादेश के जरिये उ.प्र.राज्य सीमेण्ट निगम लि. की स्थापना होने के बाद राजकीय सीमेण्ट फैक्ट्री चुर्क, डाला, चुनार के कार्मिकों को निगम में हस्तांतरित कर दिया गया था। इन कर्मचारियों की सेवाएं पहली अप्रैल 1981 को कट आफ डेट मानते हुए उ.प्र.सीमेण्ट निगम में संविलीन हो गयी थीं।मगर समय बदलने के साथ उ.प्र.सीमेण्ट निगम धीरे-धीरे बीमार औद्योगिक इकाई हो गया। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आठ दिसम्बर 1999 के आदेश से इस निगम को बंद घोषित कर दिया गया। इसके बाद इस निगम के कार्मिकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में सुनील कुमार वर्मा व अन्य बनाम उ.प्र.राज्य तथा अन्य और कुछ अन्य सम्बद्ध अपीलों की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितम्बर 2015 को आदेश दिया था। मगर देश की सर्वोच्च अदालत के इस फैसले का समय रहते अनुपालन नहीं हुआ जिसके चलते राज्य सरकार पर अवमानना के वाद दायर हुए थे।

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