
जातिवाद का जहर देश में क्यों घोलते हो से गूंजा मंच
Lucknow News - सरदार बल्लभ भाई पटेल साहित्यिक एवं सामाजिक संगठन ने फरीदी नगर में भीष्म जयंती पर एक कवि सम्मेलन आयोजित किया। मुख्य अतिथि अवनीश कुमार सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिनमें हास्य, प्रेम और सामाजिक मुद्दों पर कविताएं शामिल थीं।
सरदार बल्लभ भाई पटेल साहित्यिक एवं सामाजिक संगठन की ओर से भीष्म जयंती पर फरीदी नगर के कुर्मी क्षत्रीय महासभा भवन में एक शाम साहित्यकारों के नाम... अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एमएलसी अवनीश कुमार सिंह ने मां शारदे के चित्र के सामने दीप प्रज्जवलित कर किया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ गीतकार डॉ. निशा सिंह नवल की सरस्वती वंदना से हुआ। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पातीराम गंगवार ने मुख्य अतिथि और कवियों को अंग वस्त्र एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया। बलरामपुर के गीतकार कन्हैया लाल मधुर ने हमको हजार ख्वाब दिखाती है जिंदगी, दुख दर्द का एहसास कराती है जिंदगी... सुनाकर तालियां बटोरीं।
कानपुर से शृंगार की कवियत्री अंकिता शुक्ला ने प्यार तो प्यार है व्यापार न समझना तुम, मेरी चुप्पी को मेरी हार न समझना तुम। मैं अगर चुप हूं तो हालात बुरे हैं मेरे, बुरे हालात है लाचार ना समझना तुम... सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। लखनऊ के हास्य कवि चेतराम अज्ञानी ने राजनीति के चक्कर में अब कोई ना परो, भाईचारा बढ़ेगा कैसे इसपे ध्यान धरो। जातिवाद का जहर देश में क्यों घोलते हो, हम सब है भारत वासी यह आंदोलन करो... सुनाकर तंज कसा। वहीं, डॉ. निशा सिंह नवल ने सुनती दहेज के लिए ताने वो रोज थी, शादी में जिसकी बाप का घरबार बिक गया। बाराबंकी के हास्य कवि प्रमोद पंकज ने धूप में तपाया गया लाइन में लगाया गया, सूर्य की किरण जैसे आग की तरह खिली। पावर लगाया आधार भी दिखाया लेकिन, महारानी यूरिया जी ना मिली तो ना मिली... सुनाया। गीतकार भारती पायल ने श्याम तुम्हीं अति सुंदर हो उर में रहते मन भावन मोहन, जीवन के धन भाग्य बने तुम हो करते उर पावन मोहन। चैन चुरा कर गोकुल की गलियां फिरते बन सावन मोहन, हाथ लिये मुरली अति मोहक मोह रहा मन गावन मोहन... सुनाकर तालियां बटोरीं। हास्य कवि गोबर गणेश, डॉ. सरिता कटियार, कासगंज के अजय अटल, ओज के कवि लवलेश यदुवंशी, गजलकार अनीता अरोड़ा, बनारस के गीतकार पं. भूषण त्यागी, राष्ट्रवादी कवि डॉ. ओपी वर्मा ओम, धीरेंद्र मोहन कटियार, प्रतापगढ़ से ओज के कवि लवलेश यदुवंशी ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं।

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