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गेहूं की खरीद में विचौलिओं से बना कैश संकट

सरकारी गेहूं क्रय केन्द्रों पर कमीशन और खरीद में ढिलाई का फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं। लेकिन बिचौलियों की यही खरीद से कैश का बड़ा संकट खड़ा हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के बैंक ज्यादा कैश देने में आनाकानी कर रहे हैं। क्योंकि बिचौलिए किसानों को खरीद का लगभग 95 फीसदी नगद भुगतान कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो गेहूं की बिक्री में लगभग 60-70 फीसदी खरीदारी बिचौलिये कर रहे हैं।

पहले ही नगदी की कमी से परेशान हैं बैंक

कुछ समय पहले शहर के लगभग 80 फीसदी एटीएम कैश की कमी से लगभग बंद पड़े रहे। यही हाल अब ग्रामीण इलाकों की बैंकों का है। इस समय गेहूं की फसल कटने के बाद इसकी खरीद-फरोख्त का काम तेजी पर है। सरकारी क्रय केन्द्र तो किसानों को भुगतान सीधे खाते में कर रहे हैं ऐसे में किसानों को आसानी से अपना पैसा मिल जाता है। लेकिन सरकारी गेहूं क्रय केन्द्र की खरीद में लापरवाही से बिचौलिये गेहूं खरीद पर हावी हैं। लेकिन किसान इन विचौलियों से अपनी फसल की कीमत नगद ले रहे हैं। यही किसान और बिचौलियों के बीच की व्यवस्था से कैश का संकट खड़ा होने लगा है। बख्शी का तालाब के किसान शिवलाल ने बताया कि सरकारी गेहूं क्रय केन्द्र पर पिछले एक हफ्ते से तौलाई के लिए रोज आ रहा हूं लेकिन गेहूं की तौलाई नहीं हो पाई है। हमारे साथ के कई किसानों ने इस व्यवस्था से ऊबकर बिचौलियों के हाथों गेहूं बेचकर अपना थोड़ा कम पैसा ही लेकर घर चले गए।

ग्रामीण क्षेत्र के बैंक कैश देने में कर रहे आनाकानी

बख्खी का तालाब में अनाज आढ़तिया सुरेश जायसवाल बताते हैं कि किसानों से गेहूं खरीद करने पर उन्हें नगद पैसा देना पड़ रहा है। लेकिन जैसे-जैसे यह काम आगे बढ़ा तो बैंकों ने अब ज्यादा नगदी देने से आनाकानी कर रहे हैं। अनाज खरीदने वाले व्यापारियों का कहना है कि जैसे-जैसे खरीद आगे बढ़ेगी तो कैश का संकट बन सकता है।

कोट:-

सरकार की मंशा है कि कैश की निकासी कम हो। ऐसे में डिजिटल और चेक पेमेंट का चलन बढ़ा है। सरकारी क्रय केन्द्रों से बिक्री पर किसानों को कोई परेशानी नहीं होगी। वैसे बैंकों को जितना पैसा मिलता है उससे लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

केके सिंह, प्रांतीय महामंत्री, भारतीय स्टेट बैंक स्टाफ एसोसिएशन

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  • Web Title:Cash crisis created by Vicholians in wheat procurement