मंत्री संजय निषाद और सपा विधायकों में तीखी बहस, छीने हाथ से कागज

Feb 18, 2026 10:09 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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Lucknow News - बजट पर चर्चा के दौरान मंत्री डॉ. संजय निषाद ने नेता प्रतिपक्ष से माफी मांगने को कहा, अन्यथा एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी। उन्होंने सपा और कांग्रेस पर निशाना साधा, आरोप लगाया कि दोनों पार्टियों ने निषाद समुदाय का हक छीना है। बहस के दौरान सपा विधायकों ने मंत्री के हाथ से कागज छीने।

मंत्री संजय निषाद और सपा विधायकों में तीखी बहस, छीने हाथ से कागज

- बजट पर चर्चा के दौरान मंत्री डॉ. संजय निषाद ने कहा- नेता प्रतिपक्ष माफी मांगें अन्यथा उनपर एससी-एसटी एक्ट में दर्ज होगा मुकदमा - मंत्री ने सपा और कांग्रेस पर किया तीखा हमला, कहा- निषादों का हक छीना दोनों पर्टियों ने लखनऊ, विशेष संवाददाता। बजट पर चर्चा के दौरान बुधवार शाम को मत्स्य संजय निषाद और सपा विधायकों में तीखी बहस हो गई। विरोध करते हुए सपा कार्यकर्ता वेल में आ गए। इस बीच सपा विधायकों ने मंत्री के हाथ से कागज छीने। संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे मंत्री हमले की कोशिश बताते हुए पीठ से शिकायत की।

डॉ. निषाद ने बजट की तारीफ करने के बाद सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला किया। निषाद समुदाय ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी, मुगलों से लड़ाई लड़ी और पिछले 75 साल से इन बेईमानों (कांग्रेस) से भी लड़ रहे हैं। ये जो दाहिने बैठे हैं (सपा के लोग) इन्होंने 30 साल की सत्ता में एक रुपया भी नहीं दिया मछुआ समाज के लिए। केंद्र सरकार ने 67 साल में पूरे देश में 3000 करोड़ रुपये दिए। यूपी ने तो एक रुपया भी नहीं दिया। एक मंत्री बनाकर बैठाया था। हमारे विभाग में एक मछुआ पद हुआ करता था उसे उर्दू अनुभाग में भर्ती कर दिया। निषाद उर्दू पढ़ता है या मछली उर्दू पढ़ती है। ये मछुआरों के मगरमच्छ हैं। एक रुपया दिया नहीं, ऊपर से दिल्ली से आए पैसे भी खा गए। उन्होंने मोदी और योगी की तारफी भी की। अपने विभाग की उपलब्धियां गिनाने के बाद एक बार फिर डॉ. निषाद सपा पर हमलावर हुए। उन्होंने कहा कि हमारे जितने भी निषाद नेता थे, सबको मरवा दिया। फूलन देवी, जमुना निषाद, महेंद्र सिंह राजपूत, धनीराम वर्मा, रघुबर दयाल वर्मा, हमारे लिए जो भी आवाज उठाता था, उन्हें मरवा देते थे। मांफी मांगे वर्ना एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज कराएंगे इसी बात पर टोकाटाकी शुरू हो गई। मंत्री नहीं रुके और वह बोलते गए। पिछली सरकारों ने नौकरी लूटी। रोजी रोटी लूट ली। केवटवा, मल्लावा और बिंदवा कह कर मारा जाता था। गोरखपुर में हमने आंदोलन किया। हमारे समाज ने हमें यहां भेजा है कि जाओ और इन लोगों का पर्दाफाश करो। इस बीच बहस और नोकझोक तेज होती गई। इस पर डॉ. निषाद ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा राज्यपाल के अभिभाषण पर अपने वक्तव्य के दौरान इस्तेमाल किए गए जातिसूचक शब्द की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अपने नेता से कहिए कि माफी मांगें। अगर नहीं मांगते हैं तो एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करवा दिया जाएगा। उन्होंने जो जातिसूचक शब्द कहे वह सम्मनित शब्द है। बाबा साहब ने जाति को संविधान में लिखा है। इस दरम्यान सपा सदस्य मंत्री के शब्दों पर ऐतराज जताते रहे। डॉ. निषाद ने कहा कि सामाजिक न्याय की रिपोर्ट कहती है कि पिछड़ों का 27 प्रतिशत आरक्षण मिल्कमैन खा गए और 23 प्रतिशत आरक्षण का हिस्सा लेदरमैन खा गए। सपा सदस्य इसके बाद वेल में आ गए। तब उन्होंने कहा कि यहां पहले अंग्रेज बैठते थे। निषादों ने उनसे लड़ाई लड़ी तब यहां लोग सदन में बैठे हैं। निषादों को क्रिमिनल कास्ट घोषित किया गया। अंग्रेजों के काले कानून से हम प्रभावित हैं। क्या यावद भी प्रभावित हैं? सपा सदस्यों के वेल में आने पर लगातार पीठ की तरफ से मंत्री को निर्देश दिए जाते रहे कि वह अपनी बात खत्म करें। हालांकि, डॉ. निषाद अपनी बात कहते ही रहे। कुछ सपा सदस्य डॉ. निषाद की तरफ बढ़े और उनके हाथ से कागज छीना। मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे हाथपाई बताते हुए हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि यही सपा का आचरण है। इतने पर भी जब विवाद थमता नहीं दिख रहा था तब विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना को आना पड़ा। उन्होंने आकर दोनों पक्षों को शांत करवाया और कहा कि जैसे सदन चलता रहा है वैसे ही चलने दिया जाए। अगर लोग नहीं चाहते कि सदन चले तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है। सतीश महाना ने कहा कि यह बिल्कुल उचित नहीं है कि इस तरह आपस में बात की जाए। उन्होंने कहा कि व्यंग्यात्मक या चुटीले तौर पर अपनी बात कही जा सकती है लेकिन शब्दों की मर्यादा सभी को बनाए रखनी चाहिए।

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