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ब्रज भाषा और साहित्य का प्रचार बढ़ना चाहिए

अखिल भारतीय उदासीन सम्प्रदाय संगत ने मनाया ब्रज भाषा महोत्सव लखनऊ। निज संवाददाताब्रज भाषा और उससे जुड़ा साहित्य अनूठा है। इसके प्रचार व प्रसार के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। जब अवध की नगरी में ब्रज भाषा बोली जाती हैं तो उसकी मिठास मन को छू जाती है। यह बात भगवताचार्य श्री विष्णुशरण भारद्वाज ने कही। वह मंगलवार को खदरा स्थित गुरूनानक शाही आश्रम में अखिल भारतीय उदासीन सम्प्रदाय संगत द्वारा आयोजित प्रथम ब्रज भाषा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर श्रीमहंत धर्मेन्द्र दास जी ने कहा कि भारत की संस्कृति और अध्यात्म का लोहा तो पूरा विश्व मानता है, लेकिन जरूरत है कि ब्रज भाषा को बढ़ावा मिले। भाषा और उससे जुड़े साहित्य का प्रचार हो। वृंदावन से आए सुरेश चन्द्र शास्त्री ने ब्रज भाषा शैली के भजनों को गाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। आचार्य रास बिहारी कौशिक ने कहा कि आज ब्रज भाषा की स्थिति बेहद चिंताजनक है। ब्रज भाषा के उत्थान के लिए ब्रज भाषा के जानकार लोगों को आगे आना चाहिए, जिससे ब्रज भाषा का विकास हो सके। इस मौके पर अंजलि गुप्ता को रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक सुरेश श्रीवास्तव ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक, विधायक पंकज सिंह, विधायक नीरज बोरा,भाजपा की मेयर प्रत्याशी संयुक्ता भाटिया, तुलसी पीठाधीश्वर के रामानुजाचार्या, देवेन्द्र मिश्रा, शैलेन्द्र मौर्या, हरिबाबू ओम व माधव रस्तोगी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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  • Web Title:braj mahotsav
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