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अस्पताल में फसा महिला मरीज का पैर

- पहले भी हो चुकी दुर्घटनाएं

निज संवाददाता, लखनऊ

बाल महिला चिकित्सालय इंदिरानगर में आशा बहु रूचि का पैर शनिवार को कैटल कैचर में फंस गया। जिसके बाद आशा बहु के चिल्लाने पर भीड़ इकठ्ठा हो गई। रोती बिलखती आशा बहु के बाएं पैर में सूजन आ गई कोशिशों के बाद भी पैर न निकला। जिसको देख सफाईकर्मचारी ने अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिक्षिका को सूचित किया मौके पर पहुंची अधिक्षिका ने पाइपों को कटवाने के आदेश दिए। मिस्त्री को बुलाकर लोहे के मोटे पाइपों को कटवाया गया। एक घंटे की मेहनत के बाद आशा बहू का पैर निकाला जा सका।

-पहले भी हो चुकी दुर्घटनाएं

पिछले दो साल में पांच बार आशा बहू संग गर्भवती का पैर फस चुका है। लेकिन पिछली अधिक्षिका ने कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा महिला मरीजों को सही से चलने की हिदायत दे डाली थी। अस्पताल में जानवर न घुस सके इसके लिए कैटल कैचर को लगाया गया है पर यहां जानवर नहीं बल्कि उल्टा गर्भवती महिलाएं और आशा बहु ही चोटिल हो रही हैं। अस्पताल में लगे मोटे पाइपों के नीचे लोहे की पत्ती न लगने के कारण हादसे हो रहे हैं।

-ठीक कराने के दिए आदेश

दो घंटे के हंगामे बाद अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिक्षिका ने कैटल कैचर को ठीक कराने और नीचे पत्ती लगाने के आदेश दिए है जिससे आगे ऐसी घटनाएं न हो सके। वहीं घायल आशा के पैर की सूजन बढ़ते देख उसके पैर का एक्स-रे कराया गया। हड्डी न टूटने पर दर्द और सूजन की दवाएं देकर उसको घर भेज दिया गया।

-वर्जन

जानवरों के अस्पताल में न घुसने के नजरिए से इसको बनाया गया पर बार-बार घटनाएं होने के कारण अब इसको ठीक कराया जा रहा है। आशा का पैर एकदम ठीक है।

डॉ रश्मि गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिक्षिका, बीएमसी इंदिरानगर

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