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अनुशसित भाजपा का बदल रहा चरित्र!

लखनऊ। रामेन्द्र प्रताप सिंहसदन में हंगामा...अधिकारियों पर टीखी टिप्पणी...फिर एक अधिकारी की पिटाई। कभी अनुशासित रहने वाले भाजपा पार्षदों के बदलते चरित्र पर नगर निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों में आक्रोश है। उन्हें भाजपा के पार्षदों से इस व्यवहार की कभी उम्मीद नहीं थी।शनिवार को नगर निगम सदन में जो कुछ भी हुआ वह अप्रत्याशित था। भाजपा के पार्षदों ने अनुशासन की हर सीमा को तोड़ने की शुरुआत से ही प्रयास किया। एक दिन पहले महापौर व नगर आयुक्त के साथ हुई बैठक में शांतिपूर्ण तरीके से सदन को चलाने पर सहमति बनी। विपक्षी पार्षदों ने अपने वादे को पूरी ईमानदारी से निभाया। लेकिन भाजपा की ओर से शुरूआत से ही उल्लंघन शुरू कर दिया। कार्यवाही अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि उससे पहले ही भाजपा पार्षद नागेन्द्र सिंह चौहान ने बोलना शुरू कर दिया। कांग्रेस पार्षद गिरीश मिश्र ने इसका विरोध भी किया। उन्होंने कहा व्यवस्था के तहत एजेंडे के तहत सदन की कार्यवाही की जाए लेकिन संख्या बल में अधिक भाजपा पार्षदों ने उनकी आवाज को दबा दिया। अव्यवस्था का बोलबालासदन में सबसे ज्यादा अव्यवस्था भाजपा के पार्षदों की ओर से रही। कोई आपस में बात करता रहा तो कोई मोबाइल पर वीडियो व गेम खेलता रहा। ऐसा लगा जैसे उनको सदन की गरिमा के बारे में जानकारी ही नहीं है। कई बार भाजपा के पार्षद आपस में ही भिड़ते नजर आए। पिछले लगभग 20 वर्ष के इतिहास में इस तरह की अव्यवस्था पहले कभी नहीं हुई।अधिकारियों के लिए असंसदीय भाषा का प्रयोगसदन में भाजपा के पार्षदों ने कई बार अधिकारियों के खिलाफ असंसदीय भाषा का प्रयोग किया। पार्षदों के तीखे वार से अधिकारियों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। भरे सदन में ‘मिस्टर....., छोड़ूंगा नहीं जैसे शब्दों से चेतावनी दी गई। कोई छूठा कह रहा था तो कोई अधिकारी को चोर बना रहा था। इससे पहले भी सदन में भाजपा के एक पार्षद ने जलकल महाप्रबंधक के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था जिसका सभी अधिकारियों ने विरोध किया था। उसके बाद भाजपा पार्षद दल के नेता रामकृष्ण यादव ने सदन में खेद व्यक्त करते हुए मांफी मांगी थी।

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  • Web Title:BJP's changing character of disciplined BJP!