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सपा-बसपा गठबंधन के साथ 'अपनों' के विरोध की वजह जानने आ रहे शाह

प्रमुख संवाददाता / राज्य मुख्यालयभाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 11 अप्रैल को लखनऊ आ रहे हैं। अपने लखनऊ प्रवास पर लोकसभा चुनाव से पहले सपा-बसपा के गठबंधन से उपजे राजनीतिक हालात में सरकार व संगठन में फेरबदल की संभावनाओं के साथ ही अपने दलित सांसदों और सहयोगी दलों के विरोध की थाह लेंगे।फिलहाल तो उनके एक दिन के ही प्रवास की ही अधिकृत सूचना है। ऐसा समझा जाता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष इस बात को लेकर काफी चिंतित हैं कि प्रदेश सरकार के एक साल के कार्यकाल में विकास के काम की बजाय अपने सांसद-विधायक और सहयोगी दलों के मुखर होने के चर्चे आम हो रहे हैं। इसके अलावा प्रवास के दौरान वे यह भी समझेंगे कि संगठन और सरकार की ओर से ऐसे कौन से हालात बने कि बसपा 23 साल पुरानी अपनी कटुता को भुलाकर सपा के साथ उपचुनाव में जा मिल गई और अब लोकसभा चुनाव साथ लड़ने जा रही है।मंत्रियों के कामकाज की करेंगे समीक्षापार्टी सूत्रों के अनुसार 11 अप्रैल को अमित शाह सांगठानिक मुद्दों पर तो कम बल्कि एक साल की सरकार और उनके मंत्रियों के कामकाज पर ज्यादा ही समीक्ष्रा करेंगे। प्रत्येक मंत्री के बारे में मिले फीडबैक को लेकर एक-एक मंत्री का रिपोर्ट कार्ड उनके सामने होगा। इस आधार पर आधा दर्जन से अधिक काबीना व राज्य मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर उनका असंतुष्ट होना लाजिमी है।संगठन और सरकार का अगड़ा नेतृत्व विचारणीय मुद्दा2019 के लोकसभा चुनाव के मद्दनेजर हुए सपा-बसपा गठबंधन की हवा निकालने की कोशिश में केन्द्रीय नेतृत्व हर जुगत भिड़ाने के मूड में है। ऐसे में केन्द्रीय नेतृत्व संगठन और सरकार के अगड़े वर्ग के नेतृत्व के मुद्दे को भी अपने विचार-विमर्श की कड़ी में रखे हुए है। राजभर और अपना दल को तौलेंगे अलग-अलग तराजू मेंश्री शाह के सामने विधान परिषद सदस्यों के संभावित प्रत्याशियों के नाम भी होंगे। मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष इनमें कुछेक नाम जोड़ सकते हैं तो कुछ को काट भी सकते हैं। भाजपा के दो सहयोगी दल अपना दल और भारतीय सुहेल देव समाज पार्टी भी हैं। सरकार के शुरुआती दिनों से ही नाराज चल रहे सुहेलदेव समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के तेवर राज्यसभा चुनावों के दौरान इतने तीखे हो गए कि उन्होंने अपने चार विधायकों का सपोर्ट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलने के बाद ही देने की शर्त रख दी। श्री शाह के बुलाने और मनाने के बाद ही राजभर भाजपा के समर्थन के लिए तैयार हुए। लेकिन ओमप्रकाश राजभर चुनाव के दौरान अपना घर नहीं संभाल पाए। उनके दो विधायकों ने भाजपा को समर्थन ही नहीं दिया। उधर, अपना दल के सभी 9 विधायक राज्यसभा की परीक्षा में बीजेपी के लिए खरे उतरे। अमित शाह अपने एक दिन प्रवास के दौरान दोनों ही दलों को अलग-अलग तराजू पर तौलेंगे। मुमकिन है कि इसमें गठबंधन धर्म का सही ढंग से पालन करने वाले अपना दल का पलड़ा भारी रहे और उसके एक दावेदार को पार्टी विधान परिषद के प्रत्याशी के रूप में उतार दे।

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  • Web Title:BJP President Amit Shah