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अति आत्मविश्वास में गच्चा खा गई भाजपा

गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव नतीजों ने भाजपा को सबक दिया है। इस चुनाव को हल्के में लेकर भाजपा ने बड़ी गलती की, जिसकी वजह से यह करारा झटका लगा है। भाजपा नेतृत्व जब हार के कारणों का मंथन करेगा तो ये बाते उनके सामने आएंगी।

संगठन और प्लानिंग के लिए भाजपा जानी जाती है। जिस तरीके से भाजपा ने यह चुनाव लड़ा लगा ही नहीं कि कोई अतिरिक्त प्रयास किया जा रहा है। सामान्य तरीके से भाषणों और नारों के बीच यह चुनाव भाजपा लड़ी। टिकट बंटवारे में जाति का ख्याल रखा गया लेकिन मतों को सहेजने के लिए जातीय नेताओं को माइक्रोप्लानिंग के तहत चुनाव क्षेत्र में नहीं उतारा गया। पूर्व में देश के विभिन्न हिस्सों में हुए चुनावों में मिली सफलता को मानक मानते हुए यह मान लिया गया था कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है जनता साथ देगी।

गठबंधन को हल्ले में लेना रही बड़ी भूल

उपचुनाव में सपा और बसपा के बीच गठबंधन नहीं था, लेकिन सपा प्रत्याशी को दिया गया बसपा का समर्थन गठबंधन से अधिक कारगर रहा। लगातार हार के कारण सपा और बसपा दोनों दलों के नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं में जीतने की जिद्द थी। दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गंभीरता से अपना काम किया। वहीं भाजपा ने इस समर्थन को तनिक भी गंभीरता से नहीं लिया। सपा-बसपा के गठबंधन को बेमेल बताने में ही सारी ऊर्जा खपाते रहे। गठबंधन को कमजोर करने या फिर इससे बड़ी लकीर खींचने का कोई प्रयास नहीं किया। फूलपुर में अंतिम दिन के प्रचार के दौरान अखिलेश की सभा में उमड़ी भीड़ और सड़कों पर उमड़ा हुजूम देखकर भी भाजपा नेताओं की तंद्रा नहीं भंग हुई।

सपा ने बूथ स्तर तक लगा रखा था नेताओं को

पूरे उपचुनाव के दौरान सपा ने बेहतर प्लानिंग का परिचय दिया। सपा के नेता पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, पदाधिकारी सभी गोरखपुर और फूलपुर में जमे हुए थे। जातीय गोलबंदी कर बैठकें करते रहे। यहां तक कि महिला पदाधिकारी भी गोरखपुर और इलाहाबाद में ठहरकर चुनाव प्रचार में जुटी रहीं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दोनों जगह ना सिर्फ जनसभाएं की बल्कि लगातार मानीटरिंग भी करते रहे थे।

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  • Web Title:BJP loose in over-confidence