biggest challenge in front of Indian women wrestler - भारतीय महिला मल्लों के सामने यह साल बड़ी चुनौती DA Image
22 नवंबर, 2019|7:39|IST

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भारतीय महिला मल्लों के सामने यह साल बड़ी चुनौती

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भारतीय महिला पहलवान इन दिनों राजधानी के साई सेंटर में अपनी कलाइयां मजबूत कर रही हैं। वे दमखम बढ़ाने के लिए सुबह-शाम मेहनत कर रही हैं। इस मेहनत के पीछे कारण यह है कि इस साल उन्हें एक नहीं कई कसौटियों पर खरा उतरने की चुनौती है। उन्हें एशियन चैंपियनशिप, एशियन गेम्स, राष्ट्रमण्डल खेल के साथ वर्ल्ड कप में अपनी ताकत का लोहा मनवाना है। फिलहाल रियो ओलंपिक की पदक विजेता साक्षी मलिक, राष्ट्रमण्डल चैंपियन विनेश, रीतू फोगाट समेत कई नामी पहलवान इस समय दिल्ली में हो रही प्रो कुश्ती लीग में अपना दमखम दिखाएंगी। बाकी की पहलवान साई सेंटर में ट्रेनिंग में जुटी हैं। हाल ही में साई सेंटर में महिला पहलवानों से उनकी तैयारियों पर बातचीत हुई।
भारतीय महिला पहलवानों है जीत की भूख : विनेश फोगाट
भारतीय महिला पहलवानों ने राष्ट्रमण्डल खेल, राष्ट्रमण्डल चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप, एशियन गेम्स जैसे बड़े मंचों पर अपने को खूब साबित किया है। तमाम पदक बटोरे हैं। पर वर्ल्ड चैंपियनशिप ऐसी जगह है जहां भारतीय महिला पहलवानों को अभी और मेहनत करने की जरूरत है। राष्ट्रमण्डल चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता विनेश फोगाट कहती हैं कि अब भारतीय महिलाएं जीत की भूखी हैं। पिछले दस वर्षों में भारतीय महिला पहलवानों ने साबित कर दिया है कि वे भी बड़े प्लेटफार्म पर उम्दा प्रदर्शन कर सकती हैं। लंदन ओलंपिक (2012) में सिर्फ गीता फोगाट महिला पहलवान थीं। पर अगले यानी रियो ओलंपिक में तीन महिला पहलवान साक्षी, बबिता और वह खुद खेलने गई थीं। साक्षी ने पदक भी जीता। यह साल पहलवानों के लिए बेहद व्यस्त है। उन्हें करीब आधा दर्जन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने को साबित करना है। अब कम्पटीशन भी ज्यादा है। दुनिया में महिला पहलवानी का स्तर बढ़ रहा है। ऐसे में खुद को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार रखना सबसे बड़ी चुनौती है। 
टोक्यो ओलंपिक में और पदक आएंगे : गीता फोगाट
देश की सबसे अनुभवी महिला पहलवान गीता फोगाट कहती हैं कि महिलाओं में कुश्ती के प्रति रुझान बढ़ रही है। पहले कैम्प में गिनी-चुनी लड़कियां ही आती थीं अब भरमार है। रियो ओलंपिक में तीन पहलवान पहुंची। इसमें साक्षी मलिक ने पदक जीतकर इतिहास रच दिया। टोक्यो ओलंपिक में कम से कम छह महिला पहलवान कुश्ती लड़ती नजर आएंगी। कुश्ती में ज्यादा पदक आएंगे। राष्ट्रमण्डल चैंपियनशिप में 59 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली गीता कहती हैं कि ऐसा नहीं था कि राष्ट्रमण्डल चैंपियनशिप का स्तर कमजोर था। हमारी पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन किया। सभी की तैयारी अच्छी थी। उन्होंने बताया कि जब वह चोटिल हुई थीं तो लगा कि अब वापसी करना मुश्किल होगा। पर उन्होंने कड़ी मेहनत कर नवम्बर में हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर वापसी की। इसके बाद राष्ट्रमण्डल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अहमियत जताई। 
अपनी कमियां खुद देखती हूं : साक्षी मलिक
हरियाणा की साक्षी मलिक मौजूदा समय भारतीय महिला कुश्ती की स्टार हैं। राष्ट्रमण्डल चैंपियनशिप में उन्होंने भी स्वर्ण पदक जीता। वह कहती हैं कि महिलाओं की कुश्ती में अब बदलाव आया है। पहले  महिलाएं बोलने में हिचकिताची थीं। अब खूब बोलती हैं। अपनी बात रखती हैं। वह कहती हैं कि वह कोच की देखरेख में ट्रेनिंग करती हैं। इसके अलावा वह अपनी खुद तलाशती हैं। फिर उनपर अलग से वर्क करती हैं। यही उनकी सफलता का राज है। उनके मुताबिक अब पहले ज्यादा कम्पटीशन होने लगे हैं। हरियाणा में तो स्थानीय स्तर पर बड़े-बड़े दंगल होते हैं। इनमें इनाम के तौर पर खूब पैसा भी मिलता है। इसका फायदा यह हो रहा है कि जो लोग अपनी बेटियों के घर से नहीं निकलने देते थे अब खुद कहते हैं कि ‘जा बेटा...घर में क्यों बैठी है, अखाड़े जा और कुश्ती लड़।’ यही कारण है कि अब पहलवानी में लड़कियों की तादात बढ़ रही है। लड़कियों की जितनी तादाद बढ़ेगी उतना अच्छा कम्पटीशन होगा।
हमें तो अभी सीखना है : दिव्या काकरान
दिल्ली की दिव्या काकरान देश की सबसे प्रतिभाशाली पहलवान हैं। उनका कुश्ती लड़ने का तरीका और उनकी मेहनत देखकर सभी दावा करते हैं कि टोक्यो ओलंपिक में दिव्या पदक जीतेंगी। पर दिव्या कहती हैं कि ‘मुझे अभी और सीखना है।’
बेहद शांत रहकर अपना वर्क करने वाली दिव्या कहती है कि उन्होंने जूनियर स्तर पर कई पदक जीते। पर जोहानेसबर्ग में हुई राष्ट्रमण्डल चैंपियनशिप में जीता गया स्वर्ण उनके अंतरराष्ट्रीय कॅरियर का अब तक का सबसे बड़ा पदक है। वह बताती है कि ‘इसी साल मैं जूनियर से सीनियर कैटेगरी में  पहुंची हूं। मैं सीनियर वर्ग में आकर थोड़ा घबरा रही थी। पर सीनियर खिलाड़ियों ने मेरा हौसला बढ़ाया। मैंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में खुलकर कुश्ती लड़ी। ऐसे ही राष्ट्रमण्डल चैंपियनशिप में जब मैंने नाइजीरिया की ओलंपियन को शिकस्त दी तो मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया। मैंने स्वर्ण पदक जीता।’
कुश्ती की बड़ी प्रतियोगिताएं
वर्ल्ड कप : 17-18 मार्च,जापान
एशियन चैंपियनशिप सीनियर : 28 फरवरी से 04 मार्च, कजाखस्तान
एशियन चैंपियनशिप जूनियर : 19 से 22 जुलाई, दिल्ली
एशियन चैंपियनशिप कैडेट : 03 से 06 मई, ताशकंद
वर्ल्ड चैंपियनशिप सीनियर : 22 से 28अक्तूबर, बुडापोस्ट (हंगरी)
वर्ल्ड चैंपियनशिप जूनियर : 18से 23 सितम्बर, त्रनावा (स्लोवाकिया)
वर्ल्ड चैंपियनशिप कैडेट : 03 से 08 जुलाई, जागरेब (क्रोएशिया)
राष्ट्रमण्डल खेल : 04 से 15 अप्रैल, गोल्ड कोस्ट (आस्ट्रेलिया)
एशियन गेम्स : 18 अगस्त से 02 सितम्बर, जकार्ता (इण्डोनेशिया)

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