Bhole-Bhandari today - बम-बम भोले-भण्डारी से गूंजेगी आज राजधानी DA Image
15 दिसंबर, 2019|2:10|IST

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बम-बम भोले-भण्डारी से गूंजेगी आज राजधानी

-सभी बड़े मंदिरों और शिवालों को रंगबिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया

-मनकामेश्वर मंदिर डालीगंज, बुद्धेश्वर सहित बड़े मंदिरों में उमड़ेंगे शिवभक्त

सावन के पहले सोमवार पर भोले-भण्डारी की पूजा के लिए राजधानी तैयार हो चुकी है। सभी बड़े मंदिरों और शिवालों को रंगबिरंगी लाइटों से सजाया गया है। सावन के पहला सोमवार पर भोर से ही भक्तों का तांता लग जाएगा। इसके लिए प्रशासन ने भी व्यवस्थाएं की हैं। डालीगंज स्थित मनकामेश्वर मंदिर में रविवार देर रात से ही बाबा के दर्शनों और पूजा के लिए भक्त कतारों में लग जाते हैं।

मोहान रोड का बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, सदर का द्वादश ज्योर्तिलिंग धाम हो या फिर नादान महल रोड का प्रतिष्ठित सिद्धनाथ मन्दिर। शिव की भक्ति में सभी जगह भक्त लीन नजर आएंगे। रविवार रात से ही मंदिरों की रौनक बढ़ गई। यहां की गई लाइटिंग और सजावट देखते ही बनी। इन्दिरानगर के भूतनाथ मन्दिर, कल्याण गिरि मन्दिर, आगामीढ़ ढ्योढ़ी सुभाष मार्ग स्थित सौ वर्ष पुराना महामंगलेश्वर महादेव मन्दिर में भी विशेष आयोजन की तैयारियां हैं। मंदिरों में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक भी होंगे। राजेन्द्रनगर स्थित महाकाल महाशिव मन्दिर में उज्जैन के महाकालेश्वर की तर्ज पर भोलेनाथ की भस्म आरती होती है। इसके अलावा रकाबगंज के नागेश्वर महादेव मन्दिर, चौक के कोनेश्वर मन्दिर, ठाकुरगंज के कल्याणगिरी मन्दिर, मुकारिमनगर के लम्बेश्वर बम भोला मन्दिर, सुभाष मार्ग के महामंगलेश्वर मन्दिर, ठाकुरगंज के मां पूर्वी देवी एवं महाकालेश्वर मन्दिर, सीतापुर रोड के नागेश्वर महादेव मन्दिर, चौक के कोतवालेश्वर मंदिर में सावन के पहले सोमवार को भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।

सावन के सोमवार

पहला सोमवार 22 दूसरा 29, जुलाई, तीसरा 5 अगस्त और चैथा व आखरी सोमवार 12 अगस्त को पड़ेगा।

सावन माह में शिव उपासना का विशेष महत्व

सावन महीने में महादेव शिव शंकर पृथ्वी लोक पर आकर कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं। इसलिए इस माह भगवान शिव से जो भी कामना की जाती है वह शीघ्र पूर्ण होती है। श्रावण मास में वर्षा का भी महत्व है। शिव का एक नाम गंगाधर भी है। शिव ने अपनी जटा गंगा जी के वेद को संभाला था और पृथ्वी पर निर्मल जल प्रवाहित किया था। जिससे प्राणि जगत गंगा माता के जल रूपी अमृत को प्राप्त कर सके। इस मास शिव की अराधना के साथ इंद्रआदित्य की उपासना करने से पुण्य मिलता है।

पंडित मनोज शास्त्री

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