
‘विकसित भारत के लिए यूपी से 98 लाख सुझाव’
Lucknow News - संस्थागत विकास योजना विश्वविद्यालय की दिशा, प्राथमिकताएं और प्रभाव ‘विकसित भारत के लिए यूपी से 98 लाख सुझाव’
बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय का विश्वविद्यालय दिवस पर तीन दिवसीय समारोह शनिवार से शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एवं चाणक्य विश्वविद्यालय, बेंगलुरू के प्रो. केवी राजू थे। शिक्षा संस्थानों की भूमिका सिर्फ ज्ञान तक सीमित नहीं मुख्य अतिथि प्रो. केवी राजू ने कहा कि विश्वविद्यालय की विगत 30 वर्षों की विकास यात्रा अत्यंत सार्थक, सशक्त एवं उपलब्धियों से परिपूर्ण रही है। अब हम सभी को विकसित भारत-2047 के स्वप्न को साकार करने के लिए आगामी 22 वर्षों के लिए स्पष्ट, दूरदर्शी एवं आउटकम आधारित लक्ष्य निर्धारित करने होंगे।
इसके लिए संस्थागत विकास योजना की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विश्वविद्यालय की दिशा, प्राथमिकताएं और प्रभाव को तय करती है। प्रो. राजू ने बताया कि उत्तर प्रदेश इस प्रक्रिया को अपनाने वाला देश का प्रथम राज्य है, जहां विकसित भारत-2047 के लिए 98 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। यह दर्शाता है कि शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय सहभागिता की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विश्वविद्यालय की सफलता का आकलन वैश्विक संस्थानों के मानकों पर किया जाना चाहिए। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभावी उपयोग, छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण, कौशल-आधारित एवं उच्च गुणवत्ता वाले पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता देना आवश्यक है। विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यम का विकास विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि बीबीएयू की विकास यात्रा शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक निर्माण की एक सशक्त प्रक्रिया के समान है, जिसमें विचारों ने केंद्रीय भूमिका निभाई है। विचार नवाचार को जन्म देते हैं, नवाचार से उद्यम विकसित होते हैं और उद्यम से राष्ट्र निर्माण संभव होता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग का सशक्त होना आवश्यक है, क्योंकि देश की प्रगति केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ होने से नहीं, बल्कि सभी मानकों पर मजबूत बनने और प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से ही संभव है। इसी दृष्टि से किसी भी व्यक्ति को हाशिये पर न छोड़ते हुए योजनाबद्ध ढंग से कार्य करना और समाज से जुड़े प्रत्येक हितधारक को विकास की प्रक्रिया से जोड़ना आवश्यक है। प्रो. मित्तल ने कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता रोजगार की है, जिसके लिए पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक और जीवनोपयोगी ज्ञान को भी बढ़ावा देना होगा। उन्होंने युवाओं में रोजगार तलाशने वाले के स्थान पर रोजगार देने वाले बनने की मानसिकता विकसित करने पर बल दिया। इसके लिए अप्रेंटिसशिप एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करना, कौशल आधारित सूक्ष्म पाठ्यक्रमों की शुरुआत करना तथा उपलब्ध आधारभूत संरचना का प्रभावी उपयोग, शिक्षा में तकनीक के समुचित एकीकरण जैसे प्रयास आवश्यक है। विवि की विकास यात्रा प्रेरणादायक बीबीएयू के पूर्व कुलपति प्रो. बी हनुमैया जी ने विश्वविद्यालय से जुड़े अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने 30 वर्षों में जो अप्रतिम उन्नति की है, वह वास्तव में आश्चर्यजनक और प्रेरणादायक है। सीमित संसाधनों के साथ प्रारंभ हुआ यह विश्वविद्यालय आज सुदृढ़ एवं आधुनिक आधारभूत संरचना, विविध शैक्षणिक पाठ्यक्रमों, गुणवत्ता-युक्त शोध, नवाचार तथा अनेक शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। अर्थव्यवस्था के अनुपात में ही तय हो शिक्षा व्यय मुख्य वक्ता एवं शिक्षा, योजना आयोग के पूर्व सलाहकार प्रो. फुरकान कमर ने कहा कि बीबीएयू की बेहतर गुणवत्ता वाली शिक्षा, सुदृढ़ आधारभूत संरचना, उत्कृष्ट शोध, विविध सांस्कृतिक गतिविधियां, नैक ए डबल प्लस सहित अन्य प्रतिष्ठित रैंकिंग्स विश्वविद्यालय की 30 वर्षों की समृद्ध विकास यात्रा को दर्शाती हैं। उन्होने कहा कि उच्च शिक्षा का वास्तविक विकास तभी संभव है जब 18–24 आयु वर्ग के विद्यार्थियों का सकल नामांकन अनुपात बढ़े। प्रो. कमर ने यह भी कहा कि शिक्षा का अर्थव्यवस्था में जितना योगदान है, उतने ही प्रतिशत जीडीपी शिक्षा पर व्यय होनी चाहिए। समारोह में कार्यक्रम संयोजक प्रो. राम चन्द्रा, प्रो. कुशेंन्द्र कुशवाहा समेत अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र मौजूद रहे। -डाक्यूमेंटी में दिखायी विकास यात्रा कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के मीडिया सेंटर द्वारा तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। डॉक्यूमेंट्री में विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। जिसमें विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास, शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध कार्यों तथा आधारभूत संरचना की झलक दिखाई गई। साथ ही विश्वविद्यालय की विकास गाथा से जुड़ी पुस्तिका एवं संस्थागत विकास योजना की बुकलेट का विमोचन भी किया गया। विश्वविद्यालय 11 जनवरी को विश्वविद्यालय द्वारा विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि हेतु सामाजिक परिवर्तन का आह्वान विषय पर संगोष्ठी होगी।

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