
लखनऊ के 905 बैंक बंद, 16 हजार कर्मचारी सड़क पर, 2500 करोड़ का कारोबार प्रभावित
Lucknow News - बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने 5 दिवसीय बैंकिंग की मांग को लेकर हड़ताल की, जिससे लखनऊ में 905 बैंक शाखाएं बंद रहीं। हड़ताल के कारण लगभग 2500 करोड़ रुपये का लेनदेन ठप हो गया, जिससे व्यापारियों और आम लोगों को काफी परेशानी हुई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से उनकी मांगों को मानने की अपील की।
पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग के समर्थन में बैंक अधिकारी और कर्मचारी मंगलवार को हड़ताल पर रहे। हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने किया था। हड़ताल से लखनऊ की 905 बैंक शाखाओं के ताले नहीं खुले और करीब 2500 करोड़ की क्लीयरिंग ठप रही। इससे उन व्यापारियों और उद्यमियों को भारी परेशानी हुई, जिनके भुगतान चेक के माध्यम से होने थे। बड़े ट्रांजेक्शन न होने के कारण न केवल व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं, बल्कि निजी तौर पर लोगों के जरूरी भुगतान भी समय पर नहीं हो सके। एक ओर बैंककर्मी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे तो तो बैंक शाखाओं के गेट पर लटके तालों ने आम ग्राहकों की मुश्किलों को बढ़ा दिया।
एटीएम ‘आउट ऑफ सर्विस’ व ‘नो कैश’ के बोर्ड लगे बैंक शाखाएं बंद होने के कारण ग्राहक नकदी के लिए एटीएम पर निर्भर थे। हड़ताल की खबर से पहले ही कई लोगों ने नकदी निकाल ली थी, जिससे दोपहर होते-होते हजरतगंज, अमीनाबाद, गोमतीनगर, भूतनाथ, आलमबाग सहित शहर के कई इलाकों में एटीएम ‘आउट ऑफ सर्विस’ या ‘नो कैश’ के बोर्ड के साथ नजर आए। अमीनाबाद स्थित यूको बैंक का एटीएम और भारतीय स्टेट बैंक का एटीएम खराब था। इससे बुजुर्गों और उन लोगों को अधिक परेशानी हुई जो डिजिटल पेमेंट के बजाय बैंक काउंटर से लेनदेन करना पसंद करते हैं। इस दौरान ज्यादातर ग्राहकों को खाली हाथ लौटना पड़ा। होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की फाइलें अटक गईं। पेंशन संबंधी कार्यों और केवाईसी अपडेट के लिए आए वरिष्ठ नागरिकों को बैंकों के चक्कर काटकर निराश होना पड़ा। दाखिले या सरकारी फीस जमा करने के लिए डिमांड ड्राफ्ट बनवाने आए छात्रों और अभिभावकों के लिए हड़ताल किसी मुसीबत से कम नहीं रही। ----------------- आरबीआई, एलआईसी में पांच दिन काम, तो बैंकों में भेदभाव क्यों हजरतगंज स्थित इंडियन बैंक की मुख्य शाखा पर बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने विशाल प्रदर्शन कर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान एनसीबीई के महामंत्री डीके सिंह ने कहा कि जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, एलआईसी, सेबी, नाबार्ड और केंद्र सरकार के अधिकांश विभागों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह सफलतापूर्वक लागू है, तो बैंककर्मियों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उन्होंने इसे बैंककर्मियों के अधिकारों का हनन और सरासर नाइंसाफी करार दिया। गोमतीनगर मंत्री आवास के पास यूनियन बैंक कार्यालय के बाहर भी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। ----------------- अतिरिक्त समय देने को तैयार, फिर भी सरकार मौन इस दौरान प्रदेश संयोजक वाईके अरोड़ा और आरएन शुक्ला ने कहा कि कर्मचारी महीने के शेष 02 या 03 शनिवारों की छुट्टी के बदले प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने को तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंककर्मी काम से जी नहीं चुरा रहे, बल्कि एक स्वस्थ कार्य-जीवन संतुलन की मांग कर रहे हैं। एसके संगतानी ने बताया कि भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने पहले ही इस मांग की वैधता को स्वीकार कर सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेज दिया है, लेकिन फाइल वित्त मंत्रालय के गलियारों में दबी पड़ी है। ----------------- लखनऊ में 2500 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हड़ताल का असर बैंकिंग सेवाओं पर बहुत गहरा पड़ा। मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि लखनऊ में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 905 शाखाएं पूरी तरह बंद रहीं। लगभग 16 हजार अधिकारी और कर्मचारी काम छोड़कर प्रदर्शन में शामिल हुए। लखनऊ में लगभग 2500 करोड़ रुपये की क्लीयरिंग ठप हो गई। चेक क्लियरिंग, कैश डिपॉजिट और अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय सेवाएं रुकने से आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि जनता को होने वाली इस असुविधा की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है, जो उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज कर रही है। ----------------- ‘अधिकार है फाइव-डे बैंकिंग’ प्रदर्शन के दौरान कॉमरेड मनमोहन दास ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग कोई रियायत नहीं है, बल्कि यह बैंककर्मियों का अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो बैंककर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसा कठोर कदम उठाने पर विवश होंगे। इस दौरान लक्ष्मण सिंह, शकील अहमद, संदीप सिंह, वीके माथुर और विशाखा वर्मा सहित कई पदाधिकारियों ने बढ़ते मानसिक तनाव और कार्य के दबाव का हवाला देते हुए इस सुधार को बैंकिंग सेक्टर के लिए अनिवार्य बताया। ----------------- सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक संघर्ष जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। इससे पहले बैंककर्मियों ने धरना-प्रदर्शन, रैलियां और सोशल मीडिया पर व्यापक अभियान चलाकर सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की थी। इस दौरान वीके सेंगर, राकेश पाण्डेय, ललित श्रीवास्तव, अनुषा दुबे और प्रीति वर्मा सहित कई कार्यकर्ता शामिल थे। बैंक कर्मियों ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि जब तक सरकार अधिसूचना जारी नहीं करती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। ----------------- कर्मचारियों की प्रमुख मांग - जिस तरह आरबीआई, एलआईसी और अन्य सरकारी विभागों में शनिवार और रविवार का अवकाश रहता है, उसी तरह बैंकों में भी सप्ताह में केवल पांच दिन ही काम हो। - वर्तमान में बैंकों में दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है। कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि महीने के सभी शनिवारों को अवकाश घोषित किया जाए। - इस छुट्टी के बदले बैंक कर्मचारी प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने के लिए भी तैयार हैं। ----------------- जब आरबीआई, एलआईसी, सेबी और नाबार्ड जैसे संस्थानों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू हो सकता है, तो बैंककर्मियों के साथ यह सौतेला व्यवहार और नाइंसाफी क्यों की जा रही है, केंद्र सरकार जब तक मांग पूरी नहीं करती, यह आंदोलन और तेज होगा। संदीप सिंह, महामंत्री, आईएनबीओसी हम काम से जी नहीं चुरा रहे हैं। महीने के शेष शनिवारों के अवकाश के बदले हम प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने को तैयार हैं, ताकि कार्य और जीवन का संतुलन बना रहे। यह हमारी जायज मांग है। इस पर केंद्र सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए। डीके सिंह, महामंत्री, एनसीबीई आईबीए ने हमारी मांगों की वैधता को स्वीकार कर प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है, लेकिन केंद्र सरकार की हठधर्मिता के कारण फाइल वित्त मंत्रालय में दबी पड़ी है। अगर केंद्र सरकार ने जल्द मांग पूरी नहीं की तो आगे बड़ा आंदोलन होगा। विशाखा वर्मा, डिप्टी जोनल सेक्रेटरी, यूनियन बैंक अधिकारी संघ पांच दिवसीय बैंकिंग कोई रियायत या भीख नहीं, बल्कि बैंककर्मियों का अधिकार है। यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो हम अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसा कठोर कदम उठाएंगे। अनिल श्रीवास्तव, यूएफबीयू, जिला संयोजक हमने धरने, रैलियों और सोशल मीडिया अभियान के जरिए सरकार को जगाने की पूरी कोशिश की है। जब तक सरकार अधिसूचना जारी नहीं करती, हमारा सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रहेगा। अनिल तिवारी, मीडिया प्रभारी, यूएफबीयू ----------------- कारोबारी बोले मैं अमीनाबाद शाखा के केनरा बैंक में चेक लेकर गया था, लेकिन बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण काम नहीं हो सका। मुझे किसी को पेमेंट करना था। बैंक से कैश पैसा न निकलने से काफी परेशानी हुई। निराश होकर वापस लौटना पड़ा। सुरेश छाबलानी, व्यापारी, अमीनाबाद मार्केट तीन दिन की छुट्टियों के बाद आज बैंक हड़ताल ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी। मैं चेक कैश कराने इंदिरानगर बैंक ऑफ बड़ौदा गया तो वहां ताला लटका मिला और अधिकांश एटीएम भी खराब थे। किसी को जरूरी भुगतान करना था, लेकिन बैंकिंग सेवाएं ठप होने से निराश होकर लौटना पड़ा। देवेंद्र गुप्ता, व्यापारी, भूतनाथ मार्केट

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