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बलरामपुर : निशान यात्रा में खूब उड़ा अबीर-गुलाल

1 / 2शोभा यात्रा में खाटू श्याम का दरबार।

2 / 2शोभा यात्रा में अबीर-गुलाल खेलती महिला श्रद्धालु। 

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भगवतीगंज चंद्र प्रकाश राइस मिल से गुरुवार को निकाली गई श्याम निशान यात्रा में श्रद्धालु खूब झूमे। 301 महिलाएं निशान हाथ में लेकर खाटू श्याम के गीत गाते चल रही थीं। लोगों ने अबीर गुलाल की होली खेली। राधा-कृष्ण की झांकी पर पुष्प वर्षा की गई।
श्याम मित्र मंडल के तत्वावधान में भगवतीगंज में श्री श्याम महोत्सव का आयोजन किया गया। प्रात: दस बजे चंद्र प्रकाश राइस मिल पर खाटू श्याम का दरबार सजाया गया। मुख्य अतिथि सीओ सिटी ओपी सिंह, विशिष्ट अतिथि तुलसीपुर विधायक के पुत्र अवधेश शुक्ला एवं सभासद संजय मिश्रा ने खाटू श्याम व निशान(ध्वज) की आरती उतारी। अबीर गुलाल की होली खेली गई। उसके बाद निशान यात्रा रवाना हुई। यात्रा में 301 महिलाएं शामिल हुईं। महिलाएं राधा कृष्ण की भक्ति में लीन थीं। वे यात्रा में भक्ति गीत गाते हुए चल रही थीं। बीच बीच में डीजे की धुन पर महिला व पुरुष श्रद्धालु नृत्य भी कर रहे थे। झांकी व खाटू की मूर्ति पर पुष्पवर्षा की जा रही थी। यात्रा भगवतीगंज से होकर हमीरवासिया सदन पहुंची। वहां से गौशाला रोड, सुआव पुल चौराहा से रामजानकी मंदिर ठाकुरद्वारा पहुंच कर यात्रा समाप्त हो गई। ठाकुरद्वारा में मोहन मुरली वाला मेरा दिलदार है, कोई श्याम को सजा दे, राधा जितना रोई कान्हा के लिए, कान्हा उतना रोए सुदामा के लिए आदि गीत गाए गए। मंदिर में श्याम निशान को एकत्रित करके रख दिया गया। सभी निशान शुक्रवार को गोण्डा स्थित खाटू श्याम मंदिर भेज दिए जाएंगे। निशान यात्रा में प्रदीप गोयल, अजय अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, संजय अग्रवाल, सूरज प्रकाश अग्रवाल, अभिषेक सिंघल, अनूप सिंघल, अनूप अग्रवाल, दुलीचंद गोयल, बाबूलाल अग्रवाल, ताराचंद अग्रवाल, मोहित तुलस्यान, राजकुमार अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, रीतू अग्रवाल, पूजा अग्रवाल, पूनम गोयल, पूजा गोयल, संगीता अग्रवाल, सोनी जायसवाल, रामकुमार अग्रवाल, रवीन्द्र कमलापुरी सहित तमाम श्रद्धालु शामिल थे। शोभा यात्रा में नगर पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि शाबान अली आदि भी शामिल रहे।

खाटू श्याम के नाम से प्रसिद्ध हुए बर्बरीक 
श्याम मित्र मंडल के सदस्य प्रदीप गोयल ने बताया कि श्री खाटू श्याम को बर्बरीक नाम से जाना जाता था। वह भीम के पुत्र थे। महाभारत के युद्ध में भाग लेने के लिए बर्बरीक ने अपनी मां से आदेश प्राप्त किया। मां बोली कि महाभारत युद्ध में जो कमजोर हो उसकी तरफ से युद्ध करना। कुरुक्षेत्र की ओर जाते समय श्रीकृष्ण उन्हें ब्राह्मण स्वरूप में मिल गए। श्रीकृष्ण को पता था कि कौरव हार रहे हैं और माता के आदेशानुसार बर्बरीक कौरवों की ओर से युद्ध लड़ने लगेंगे। श्रीकृष्ण ने उससे दान मांगा। उसने ब्राह्मण रूपी श्रीकृष्ण से उनकी इच्छा पूछी। ब्राह्मण बने कृष्ण ने उसका सिर मांग लिया। बर्बरीक को एहसास हो गया कि यह ब्राह्मण नहीं कोई और है। उसने कहा कि मैंने वचन दिया है। उसका पालन करूंगा लेकिन आप अपने वास्तविक रूप में आइये। तब श्रीकृष्ण अपने वास्तविक रूप में आए। तब उसने अपना शीश श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया। उसकी अंतिम इच्छा थी कि वह महाभारत का युद्ध देखे। श्रीकृष्ण ने उसका सिर पहाड़ की ऊंची चोटी पर रख दिया। उसको वरदान दिया कि आप कलियुग में हारे का सहारा बनोगे और श्याम नाम से प्रसिद्ध होंगे। राजस्थान के झूझंनू जिले के खाटू में बर्बरीक ने पुन: अवतार लिया और श्याम नाम से विख्यात हुए। मान्यता है कि सच्चे मन से खाटू श्याम की पूजा करने वाले की मनोकामना पूर्ण होती है।

 

 

 

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  • Web Title:Balrampur: Abrar-Gulam blown away in the journey