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कुशीनगर में जाकर कराया गया बच्चों का स्वर्णप्राशन

- टूड़ियागंज के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में लगा शिविर - कॉलेज से 11 डॉक्टरों की टीम ने कुशीनगर में भी बच्चों को कराया स्वर्णप्राशन लखनऊ। निज संवाददाता टूड़ियागंज के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के डॉक्टरों ने रविवार को कॉलेज परिसर और कुशीनगर में स्वर्णप्राशन का शिविर लगाया। दो जगह एक साथ लगाए गए शिविरों में सात सौ से अधिक बच्चों को स्वर्णप्राशन की दवा पिलायी गई। 230 बच्चों को पिलायी दवा आयुर्वेदिक कॉलेज के कौमारभृत्य (बालरोग) विभाग की ओर से तृतीय स्वर्णप्राशन शिविर का आयोजन हुआ। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसएस बेदार और विभाग के प्रमुख डॉ. मिथिलेश वर्मा के साथ एमडी छात्रों ने शिविर में बच्चों को स्वर्णप्राशन की तृतीय खुराक पिलायी। यहां पर 16 वर्ष तक के 230 बच्चों का पंजीकरण करके पुष्य नक्षत्र में स्वर्णप्राशन किया गया। इसमें डॉ. महेश गुप्त, डॉ. शबनम, डॉ. रेशु, डॉ. कीर्ति, डॉ. पूजा, डॉ. अनामिका, डॉ. अमित, डॉ. ब्रजनंदन समेत अन्य लोग मौजूद रहे। जेई प्रभावित इलाके में शिविर आयुर्वेद सेवाएं के निदेशक डॉ. एसएन सिंह के निर्देश पर कुशीनगर के जेई प्रभावित क्षेत्र में शिविर लगाया गया। आयुर्वेदिक कॉलेज के डॉ. पंकज कुमार सिंह के साथ 11 सदस्यीय डॉक्टरों की टीम पहुंची। रविवार को कुशीनगर के तमकुहीराज श्रीनिवास मेमोरियल पब्लिक स्कूल में शिविर लगाया गया। यहां पर डॉ. गीतिका, डॉ. प्रियंका, डॉ. मेघा, डॉ. ज्योति, डॉ. आदित्य, डॉ. नंदिनी, डॉ. मीनाक्षी व अन्य रहे। इन लोगों ने परीक्षण करके नि:शुल्क 485 बच्चों को स्वर्णप्राशन की दवा पिलायी। डॉ. पंकज ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जापानीज इंसेफेलाइटिस से प्रभावित पूर्वांचल क्षेत्र के कुशीनगर को चुना गया है। यहां पर हर माह पुष्य नक्षत्र में बच्चों को स्वर्णप्राशन कराया जाएगा। क्या होता है स्वर्णप्राशन आयुर्वेदिक कॉलेज के डॉ. अनुज वर्मा ने बताया कि स्वर्णप्राशन स्वर्ण का चूर्ण, शहद आदि आयुर्वेदिक दवाओं को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसके सेवन से बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। बच्चों में बीमारी से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। बुद्धि का विकास होता है।

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