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आयुर्वेद कॉलेज में दवाओं का संकट, मरीज बाहर से खरीद रहे

- दवाओं की किल्लत से जूझ रहा है आयुर्वेद कॉलेज - मरीजों को काढ़ा व मूलभूत दवाएं तक नहीं मिल रहीं लखनऊ। निज संवाददाता राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल में दवाओं का संकट गहरा गया है। मरीजों को अब काढ़ा तक नहीं मिल रहा है। जबकि अन्य मूलभूत दवाएं भी मरीज बाहर दुकानों से महंगे दाम पर खरीदने को मजबूर हैं। यह संकट पिछले चार माह से बना हुआ है। कई बार आयुर्वेद के उच्च अधिकारियों, आयुष मंत्री तक को दवाओं की किल्लत की जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन फिर भी हालात नहीं सुधर रहे हैं। दवा दी नहीं, मरीज से अभद्रता भी कीटूड़ियागंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल में रोजाना ओपीडी में आकर डॉक्टर को मरीज दिखा रहे हैं। डॉक्टर जो दवाएं लिख रहे हैं, वह अस्पताल के दवा काउंटर से नहीं मिल पा रही हैं। काउंटर पर बैठे कर्मचारी दवा मांगने पर अस्पताल आने वाले मरीजों से अभद्रता भी कर रहे हैं। सोमवार को ही एक मरीज ने काउंटर पर पहुंचकर दवाओं का पर्चा दिया तो कर्मचारी ने पांच से छह दवाओं में एक भी न होने बात कही। जब मरीज ने पूछा कि एक भी दवा नहीं है तो कर्मचारी ने जवाब दिया कि यहां दवाओं को छुपाकर नहीं रखा जाता है। अभद्रता से बात करने पर मरीज और कर्मचारी के बीच तीखी झड़प भी हुई। बच्चों से लेकर बड़े मरीजों की दवा नहीं अस्पताल में बच्चों से लेकर बड़े मरीजों को दवा नहीं मिल रही है। बच्चों के पेट के कीड़े, दर्द की दवा कृमि मुदगर रस, मूलभूत दवा बालचार्तुभद्र चूर्ण पिछले कई माह से नहीं है। इसमें दर्द और खुजली की परेशानी बनी रहती है। मधुमेह के मरीजों की मधुमेहारी चूर्ण, फलत्रिकादि क्वाथ आदि दवाएं मरीजों को नहीं मिल रही हैं। ऐसे ही चंद्रप्रभा वटी, दुर्बल व कमजोर मरीजों को दी जाने वाली अश्वगंधा व शतावरी चूर्ण, कुष्ठ व लिवर की आरोग्य वर्धनी वटी, कब्ज के लिए त्रिफला चूर्ण, गठिया, जोड़ों में दर्द, बवासीर आदि की दवाएं भी अस्पताल में नहीं मिल रही हैं। कुछ दिन पहले ही राज्य आयुष मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी ने केंद्रीय आयुष मंत्री के एक कार्यक्रम में दावा किया था कि दवाओं की इतनी अधिक आपूर्ति हो रही है कि डिस्पेंसरी व अस्पताल में उसे रखने की जगह नहीं है। वर्जन आयुर्वेदिक कॉलेज का सालाना 25 लाख रुपए का दवा का बजट है। कच्ची व पक्की दवाओं की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। कुछ दवाओं की कमी है। मांग की गई है, दवाओं की कमी को जल्द पूरा किया जाएगा। डॉ. सुदीप बेदार, प्राचार्य, आयुर्वेदिक कॉलेज, टूड़ियागंज

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